नीमच। जिला लेखक संघ द्वारा आर्य समाज सभागार में मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. संजय जोशी ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य के विषय, पात्र और कथानक में क्रांतिकारी परिवर्तन कर हिंदी कथा साहित्य को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासों को कल्पना और मनोरंजन की सीमाओं से निकालकर सामाजिक यथार्थ से जोड़ा।
डॉ. जोशी ने कहा कि प्रेमचंद ने सरल भाषा, जीवंत पात्रों और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से साहित्य को जनसामान्य से जोड़ा। उन्होंने समाज के गरीब, मजदूर, किसान और शोषित वर्ग को अपनी रचनाओं का नायक बनाया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद अपनी निर्भीक लेखनी से अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनचेतना जगाने वाले सच्चे "कलम के सिपाही" थे। उनकी रचनाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला लेखक संघ के संस्थापक गुणवंत गोयल ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद के व्यक्तित्व और साहित्य को समझने के लिए उनके उपन्यासों का अध्ययन आवश्यक है। वे अत्यंत ईमानदार, राष्ट्रभक्त और स्वाभिमानी साहित्यकार थे।
कार्यक्रम को आर.एस. शर्मा एवं डॉ. राजेश मंदोरिया ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर रमेश मोरे, जगमोहन कटारिया, सुरेश शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, डॉ. सुरेंद्र शक्तावत, लालाराम शर्मा, ऊषा शर्मा, बालकृष्ण सोलंकी, दुल्लीचंद कनेरिया, अथर्व शर्मा सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन मनोज स्वर्णकार ने किया तथा आभार जगमोहन कटारिया ने व्यक्त किया।