पिपलिया स्टेशन। पिपलिया क्षेत्र सहित मंदसौर-नीमच अंचल के अफीम उत्पादक किसानों की समस्या को लेकर किसान नेता श्यामलाल जोकचन्द्र ने केन्द्रीय वित्तमंत्री को पत्र लिखकर सीपीएस पद्धति के तहत अफीम डोडे तोड़ने की अनुमति शीघ्र जारी करने की मांग की है। किसान नेता ने बताया कि नारकोटिक्स विभाग द्वारा मध्यप्रदेश और राजस्थान के कई किसानों को पारंपरिक चीरा पद्धति के अलावा सीपीएस पद्धति के तहत भी अफीम के पट्टे जारी किए गए हैं। इस पद्धति में किसानों को अफीम निकालने के लिए डोडों पर चीरा नहीं लगाना होता, बल्कि पूरी तरह पके हुए साबुत डोडे नारकोटिक्स विभाग को तय मानक के अनुसार जमा करवाने होते हैं। आमतौर पर नारकोटिक्स विभाग की टीम खेतों में पहुंचकर डोडों का संग्रहण करती है और यह प्रक्रिया अप्रैल माह के अंत तक चलती है। लेकिन जब तक विभाग की टीम खेतों तक नहीं पहुंचती, तब तक किसानों को अपनी फसल की सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में खेतों में अफीम की फसल पककर तैयार खड़ी है, लेकिन अभी तक डोडे तोड़ने को लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुआ है। इससे हजारों किसानों में चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसान नेता जोकचन्द्र ने अपने पत्र में बताया कि पिछले वर्ष इसी माह में सीपीएस पद्धति के तहत किसानों को अपने खेतों में खड़ी अफीम के डोडे स्वयं तोड़ने की अनुमति दी गई थी। उस समय किसानों ने गांव के मुखिया की मौजूदगी में डोडे तोड़कर उनका वजन दर्ज कराया था, जिससे किसानों को काफी राहत मिली थी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी क्षेत्र के अधिकांश किसानों के खेतों में अफीम की फसल पककर तैयार हो चुकी है और डोडे पूरी तरह विकसित हो गए हैं। लेकिन दिल्ली से अभी तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ है, जिसके कारण किसान असमंजस में हैं कि डोडे कब और किस प्रक्रिया से तोड़े जाएंगे। जोकचन्द ने बताया कि जब तक अफीम के डोडे नहीं तोड़े जाते, तब तक किसानों को लगातार अपनी फसल की रखवाली करनी पड़ती है। कई किसान रात-रात भर खेतों में जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। डोडों की चोरी होने का खतरा भी लगातार बना हुआ है, जिसके कारण किसानों में भय और चिंता का माहौल है। साथ ही ज्यादा समय से फसल खेत में खड़ी रहने से डोडो से निकलने वाला खसखस (पोस्तदाना) खेतों में नष्ट हो जाता है, जिससे किसानों को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर डोडे तोड़ने की अनुमति मिल जाए तो किसानों को राहत मिल सकती है और फसल सुरक्षित तरीके से जमा हो सकेगी। श्यामलाल जोकचन्द्र ने केन्द्रीय वित्तमंत्री से अनुरोध किया है कि गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी किसानों को यह अधिकार दिया जाए कि वे गांव के मुखिया की मौजूदगी में स्वयं अपने खेतों में अफीम के डोडे तोड़ सकें और उनका वजन दर्ज करवाकर सुरक्षित रख सकें। बाद में मुखिया के माध्यम से यह डोडे नारकोटिक्स विभाग को सौंप दिए जाएं। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से किसानों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी और फसल की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। किसान नेता ने बताया कि यदि इस संबंध में शीघ्र आदेश जारी किए जाते हैं तो मध्यप्रदेश और राजस्थान के हजारों अफीम उत्पादक किसानों को राहत मिलेगी। मंदसौर, नीमच, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ क्षेत्र के किसान विशेष रूप से इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने केन्द्रीय वित्तमंत्री से मांग की है कि नारकोटिक्स विभाग को तत्काल निर्देशित कर सीपीएस पद्धति के अंतर्गत अफीम डोडे तोड़ने की अनुमति जारी की जाए, ताकि किसानों को अपनी फसल की सुरक्षा के लिए रात-रात भर खेतों में जागकर पहरा देने की मजबूरी से राहत मिल सके और पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।