चित्तौड़गढ़। सरकार की किसान हितैषी योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही हैं। कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही अनुदान योजनाओं का लाभ लेकर किसान अब आत्मनिर्भर बन रहे हैं और अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं।
रोटावेटर योजना से दरबार सिंह को मिली नई पहचान
ग्राम पंचायत खेरमालिया में ग्राम रथ अभियान के तहत किसान दरबार सिंह पुत्र राम सिंह राजपूत ने कृषि विभाग की कृषि यंत्र (रोटावेटर) योजना वर्ष 2025-26 का लाभ उठाया। उन्हें इस योजना के अंतर्गत 48,000 रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ।
कृषि पर्यवेक्षक से जानकारी मिलने के बाद दरबार सिंह ने ऑनलाइन आवेदन किया। सभी प्रक्रियाओं की जांच एवं प्रशासनिक स्वीकृति के बाद उन्होंने रोटावेटर खरीदा और अनुदान राशि प्राप्त की।
यह कृषि यंत्र अब उनके अपने खेतों के साथ-साथ आसपास के किसानों के खेतों में भी उपयोग किया जा रहा है। इससे जहां समय, मेहनत और ईंधन की बचत हो रही है, वहीं उन्हें अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है।
दरबार सिंह ने बताया कि “सरकारी योजना से मेरी खेती की लागत कम हुई है और आय में बढ़ोतरी हुई है। अब मैं बेहतर तरीके से खेती कर पा रहा हूं। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री और कृषि विभाग का आभार व्यक्त करता हूं।”
मल्टी-क्रॉप थ्रेशर से पूरन मल की बढ़ी आमदनी
इसी तरह ग्राम पंचायत खरदेवला में आयोजित ग्राम रथ अभियान के तहत किसान पूरन मल (पिता दृ शंभू लाल सालवी) ने कृषि यंत्र (मल्टी-क्रॉप थ्रेशर) योजना का लाभ लेकर अपनी कृषि को अधिक लाभकारी बनाया है।
वर्ष 2025-26 में उन्हें इस योजना के अंतर्गत 2,25,000 रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। उन्होंने ऑनलाइन आवेदन कर स्वीकृति के बाद मल्टी-क्रॉप थ्रेशर खरीदा।
इस यंत्र की मदद से वे न केवल अपनी फसलों की थ्रेशिंग कर रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों की फसलों की थ्रेशिंग कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। इससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
पूरन मल ने कहा कि ऐसी योजनाएं किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कृषि यंत्रीकरण से मेहनत कम हुई है और उत्पादन क्षमता बढ़ी है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
ग्राम रथ अभियान के माध्यम से ऐसे अनेक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। कृषि यंत्रीकरण योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही हैं। यह पहल आधुनिक कृषि को बढ़ावा देने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।