नीमच। जिले के जावद विकासखंड अंतर्गत ग्राम लासुर आज मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। वर्ष 2019 से पूर्व जहाँ गाँव में एक भी स्वयं सहायता समूह नहीं था, वहीं आज यहाँ 15 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 185 परिवार जुड़े हुए हैं।
समूह गठन से आर्थिक सशक्तिकरण तक का सफर-
ग्राम पंचायत लासुर में पाटीदार, रावत मीना, बैरागी, मेघवाल, जाटव एवं राठौर सहित विभिन्न सामाजिक वर्गों के परिवार निवासरत हैं। वर्ष 2019 में गरीब परिवारों की पहचान कर महिलाओं को संगठित करते हुए स्वयं सहायता समूहों के गठन की शुरुआत की गई। आज इसका परिणाम है कि गाँव में 10 महिला स्वयं सहायता समूह सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इन समूहों को यूको बैंक सरवानिया महाराज एवं एचडीएफसी बैंक नीमच के माध्यम से अब तक 75 लाख रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है।
स्वरोजगार की मिसाल बनीं ग्रामीण महिलाएं-
श्रीमती कलाबाई ने वर्ष 2019 में समूह से जुड़कर 1.50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया और किराना एवं जनरल स्टोर के साथ ब्यूटी पार्लर का कार्य प्रारंभ किया। आज वे आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं और परिवार का बेहतर ढंग से भरण-पोषण कर रही हैं। इसी प्रकार शबाना ने भी आजीविका मिशन के माध्यम से समूह से ऋण एवं सीसीएल ऋण प्राप्त कर किराना एवं जनरल स्टोर स्थापित कर सफल स्वरोजगार की शुरुआत की है।
ग्राम विकास में बढ़ा संगठनात्मक सहयोग-
मिशन के प्रयासों से महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन एवं सशक्तिकरण के साथ-साथ बैंक एवं मिशन से प्राप्त वित्तीय सहायता के माध्यम से रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। ग्राम विकास के लिए शासन एवं पंचायत स्तर पर प्रयासों को भी गति मिली है। अब लासुर गाँव में विकास की नई बयार बह रही है और पंचायतीराज संस्थाएं भी मजबूत हो रही हैं।
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी-
समूह से जुड़ी महिलाएं लाड़ली बहना, लखपति दीदी, पशु सखी एवं कृषि सखी जैसी विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं तथा अन्य महिलाओं को भी समूह से जोड़ने में सहयोग कर रही हैं। लासुर गाँव आज सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।