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May 8, 2026, 12:35 pm
BIG REPORT : दर्द भरे बचपन से उम्मीद की उड़ान, मानव सेवा बनी सहारा, नीमच में थैलेसीमिया से जंग लड़ रहे 19 बच्चों को मिला नया जीवन, बोन मैरो ट्रांसप्लांट से बदली किस्मत, पढ़े खबर 

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नीमच। कभी हर 15 दिन में खून चढ़वाने की मजबूरी, तो कभी अस्पतालों के चक्कर और दर्द से भरा बचपन थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के जीवन में अब नीमच जिले से उम्मीद और संवेदनशीलता की नई रोशनी नजर आ रही है।

जिले में वर्तमान में थैलेसीमिया के 88 मरीज पंजीकृत हैं, जिन्हें हर महीने लगभग 126 यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है। समाजसेवियों और दानदाताओं के सहयोग से अब तक 19 बच्चों का निःशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया जा चुका है, जिससे कई बच्चों को नया जीवन मिला है।

संस्था अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि थैलेसीमिया पूरे परिवार के लिए एक गंभीर चुनौती है। यदि विवाह से पहले इसकी जांच कराई जाए और दो थैलेसीमिया माइनर विवाह से बचें, तो आने वाली पीढ़ी को इस बीमारी से रोका जा सकता है।

उन्होंने बताया कि समाज को थैलेसीमिया मुक्त बनाने के लिए जिले में अब तक 6 एचएलए शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 662 लोगों की बोन मैरो टेस्टिंग की गई। इनमें 26 मरीजों की मैचिंग पाई गई, जिससे कई बच्चों के इलाज का मार्ग प्रशस्त हुआ।

नीमच जिला चिकित्सालय परिसर में थैलेसीमिया वार्ड में बेहतर सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे बच्चों को उपचार के दौरान घर जैसा वातावरण मिल रहा है। राठौड़ ने जिले में हेमेटोलॉजिस्ट की आवश्यकता बताते हुए टेली कंसल्टिंग सुविधा पुनः शुरू करने की बात कही।

विश्व थैलेसीमिया दिवस पर उन्होंने भावुक संदेश देते हुए कहा हमारी कोशिश है कि बच्चा जब पैदा हो तो वह दूध की बोतल से बड़ा हो, उसे खून की बोतल न चढ़ानी पड़े।

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