उज्जैन। रेलवे की प्रस्तावित चिंतामण बायपास योजना को लेकर किसानों, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार को मंगरोला रोड पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान वैदिक गुरुकुल के बटुक भी विरोध में शामिल हुए।
प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि रेलवे विभाग पहले ही सर्वे और नक्शे की प्रक्रिया पूरी कर चुका था, जिसमें किसानों की जमीनें चिन्हित की गई थीं। इसके बावजूद अब दोबारा सर्वे के नाम पर क्षेत्र में खंभे लगाए जा रहे हैं और भूमि का चिन्हांकन किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित बायपास से मंगरोला सहित आसपास के कई गांव प्रभावित होंगे। किसानों के मुताबिक अकेले मंगरोला गांव के करीब 38 किसान सीधे तौर पर इस परियोजना की जद में आ रहे हैं। वहीं गांव की लगभग 40 से 50 बीघा जमीन प्रभावित होने का अनुमान है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस योजना से स्कूल, वेद आश्रम, चिंतामण और मंगरोला को जोड़ने वाली मुख्य सड़क, बाग-बगीचे और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी प्रभावित होंगे। किसानों ने रेलवे को सुझाव देते हुए कहा कि शिप्रा केबिन क्षेत्र की ओर से कम दूरी और कम लागत वाला वैकल्पिक अंडरपास मार्ग बनाया जा सकता है।
किसान दीपक, जीत सिंह फौजी और सूर्यपाल सिंह ने बताया कि इस संबंध में कई बार प्रशासन और रेलवे विभाग को शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
वहीं अखिल भारतीय नागदा अग्निहोत्री धर्मशाला में संचालित वैदिक गुरुकुल के संचालक आचार्य दीपक पाठक ने भी योजना का विरोध किया। उन्होंने कहा कि धर्मशाला परिसर में देश के विभिन्न राज्यों से आए 25 से 50 बटुक वैदिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो इस योजना से प्रभावित होंगे।