मंदसौर। नेशनल लोक अदालत ने एक लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक विवाद को सुलझाते हुए तीन वर्षों से अलग रह रहे पति-पत्नी को पुनः एक कर दिया। करीब 20 वर्ष पुराने वैवाहिक संबंध में आई दरार को समझाइश और आपसी सहमति के माध्यम से समाप्त कर परिवार को फिर से जोड़ा गया।
प्रकरण के अनुसार ममता (परिवर्तित नाम) और महेश (परिवर्तित नाम) का विवाह वर्ष 2003 में हुआ था। दंपति के एक पुत्र एवं एक पुत्री हैं। लगभग 20 वर्षों तक वैवाहिक जीवन सामान्य रूप से चलने के बाद पारिवारिक विवादों के चलते दोनों करीब तीन वर्ष पूर्व अलग-अलग रहने लगे थे।
विवाद बढ़ने पर पत्नी द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 144 के तहत भरण-पोषण संबंधी प्रकरण कुटुम्ब न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। मामला न्यायालय में विचाराधीन था।
कुटुम्ब न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश श्रीमती प्रिया शर्मा द्वारा दोनों पक्षों को समझाइश देकर आपसी सुलह के प्रयास किए गए तथा प्रकरण को नेशनल लोक अदालत के लिए संदर्भित किया गया।
नेशनल लोक अदालत में सकारात्मक संवाद एवं समझाइश के बाद दोनों पक्षों ने अपने मतभेद भुलाकर पुनः साथ रहने की सहमति व्यक्त की। इस प्रकार लोक अदालत ने एक बिखरते परिवार को फिर से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।