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May 10, 2026, 3:48 pm
BIG NEWS : तबादला नीति के पहले कर्मचारियों से मांगे तीन विकल्प, अभियोजन संचालनालय ने एक जगह तीन साल से पदस्थ कर्मचारियों की जानकारी मांगी, अगली कैबिनेट में आ सकती है नीति, पढे़ खबर

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भोपाल। मध्यप्रदेश में जल्द ही बहुप्रतीक्षित स्थानांतरण नीति-2026 के लागू होने की संभावनाओं के बीच लोक अभियोजन संचालनालय ने विभागीय सर्जरी की तैयारी शुरु कर दी है। विभाग ने प्रदेश के जिला मुख्यालयों और तहसील स्तर पर पदस्थ उन सभी अभियोजन अधिकारियों और कर्मचारियों की लिस्ट मांगी है, जिन्हें एक ही स्थान पर तीन साल से अधिक का समय हो गया है।


15 मई तक मांगे तीन पसंदीदा जगहों के नाम
इस संबंध में जारी आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शासन की मंशा के अनुरूप जल्द ही राज्य स्तरीय तबादला नीति घोषित हो सकती है, जिसे देखते हुए प्रशासनिक सुविधा की दृष्टि से यह अग्रिम जानकारी जुटाई जा रही है। संचालनालय ने अधिकारियों से उनकी सुविधा के अनुसार प्राथमिकता क्रम में तीन जिलों के विकल्प मांगे हैं । कर्मचारियों को 15 मई 2026 तक निर्धारित प्रोफार्मा में अपनी चॉइस ईमेल आईडी पर भेजनी होगी।


जहां पहले पोस्टेड रहे वहां का विकल्प नहीं दे सकते
खास बात यह है कि कर्मचारी उन जिलों का चयन नहीं कर सकेंगे जहां वे पहले पदस्थ रह चुके हैं। समय सीमा के बाद मिलने वाले आवेदनों को स्वतः निरस्त माना जाएगा और जानकारी न भेजने की स्थिति में संचालनालय स्वविवेक से निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा।


जानकारी नहीं मिली तो अफसर होंगे जवाबदार
संचालनालय ने जानकारी भेजने का पूरा दायित्व उपनिदेशक और सहायक निदेशक स्तर के अधिकारियों पर डाला है । यदि किसी जिले से जानकारी अप्राप्त रहती है, तो इसके लिए संबंधित वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण नीति 2026 आने की पूरी संभावना है, इसलिए प्रशासनिक तैयारी पहले ही पूरी की जा रही है, ताकि नीति आते ही आदेश जारी किए जा सकें। कर्मचारियों को अपने वर्तमान पदस्थापना की ज्वाइनिंग तिथि के साथ पहली, दूसरी और तीसरी पसंद के जिले की जानकारी देनी होगी।


अगली कैबिनेट में आ सकती है तबादला नीति
मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 के लिए तबादला नीति का प्रस्ताव लगभग तैयार हो गया है। 15 मई से एक महीने के लिए तबादलों पर से प्रतिबंध हट सकता है। सभी विभागों के लिए बन रही तबादला नीति से स्कूल शिक्षा विभाग को पूरी तरह अलग किया जाएगा। यानी उनकी पॉलिसी अलग से आएगी। पहले तबादला नीति में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं था, लेकिन अब सामान्य प्रशासन विभाग की प्रस्तावित नीति में भी इसका जिक्र होगा।


बीते, मंगलवार यानी 6 मई को कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- श्जब पहले इस बारे में बात हो चुकी है कि तबादला नीति को जल्द लाया जाए तो फिर अभी तक ऐसा क्यों नहीं हुआ? इसे जल्दी लाओ। मेरे पास कई आवेदन आते हैं। उन्हें ए प्लस की टीप के साथ भेजता हूं, लेकिन कई मौके पर अलग-अलग मत भी आ जाते हैं। लिहाजा ट्रांसफर नहीं हो पाता। इसलिए तबादला नीति से प्रतिबंध हर साल कुछ वक्त के लिए निकाला जाएगा। आप लोग (मंत्री व प्रभारी मंत्री) इस बात का ध्यान रखें कि तबादला करते समय न्याय हो।श्


मंत्री ने दिया था प्रशासकीय और स्वैच्छिक तबादले अलग करने का सुझाव
कैबिनेट की बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने यह सुझाव दिया था कि स्वैच्छिक ट्रांसफर की सीमा को बढ़ाना चाहिए। इस श्रेणी में शिकायतों को मिला लें तो काफी आवेदन होते हैं। यदि 200 का कैडर है तो 20 तबादले ही हो पाते हैं। खासतौर पर शिक्षा विभाग में बड़ा कैडर है और सबसे ज्यादा दबाव यहीं होता है। राजपूत की बात का स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप ने समर्थन किया। इस दौरान जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने शिक्षा के साथ स्वास्थ्य विभाग को भी जोड़ने की बात कही।


राजूपत ने इस बात पर जोर दिया था कि स्वैच्छिक और प्रशासकीय आधार पर किए जाने वाले तबादलों को अलग-अलग रखना चाहिए। प्रशासकीय आधार पर होने वाले तबादलों को जोड़ देने से कोटा कम पड़ जाता है। विधायकों की शिकायतें भी आती हैं कि उनकी अनुशंसा पर तबादलों में ध्यान नहीं दिया गया।


ऐसे बना ट्रांसफर का गणित
तबादला नीति-2025 के तहत स्वैच्छिक तबादलों के लिए अलग से कोई कोटा तय नहीं किया गया है। ये कुल निर्धारित तबादलों के प्रतिशत में ही शामिल होते हैं।

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