झाबूआ। मध्य प्रदेश के मेघनगर स्थित श्री वनेश्वर मारुति नंदन हनुमान मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का दूसरा दिन आयोजित हुआ। मालवा के प्रसिद्ध संत पंडित कमल किशोर नागर ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए जीवन दर्शन और पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डाला।
पंडित नागर ने विशेष रूप से पिता की डांट के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिता की डांट को कभी बुरा नहीं मानना चाहिए, क्योंकि उसमें पुत्र के लिए वैसी ही दया छिपी होती है जैसी ईश्वर की अपने भक्तों के प्रति होती है। यह डांट वास्तव में एक सुरक्षा कवच और दया दृष्टि के समान है।
उन्होंने मनुष्य को अपने हर कर्म को पूजा मानकर करने की सीख दी। संत नागर ने कहा कि जिस प्रकार बचपन में मां की उंगली पकड़कर चलते हैं, उसी तरह जवानी में किसी संत या महात्मा का सानिध्य प्राप्त कर उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जो व्यक्ति जीवनभर संतों का हाथ थामे रहता है, मृत्यु के समय परमात्मा स्वयं उसकी उंगली पकड़ते हैं।
पारिवारिक मर्यादाओं पर बल देते हुए पंडित नागर ने कहा कि हमें कभी भी माता-पिता, गुरु और गोविंद की नजरों से नहीं गिरना चाहिए। उन्होंने बहुओं को सास की सेवा करने और पुत्रों को पिता के प्रति धैर्य रखने की भी सीख दी।
कथा के दौरान संत नागर ने आयोजन समिति के प्रमुख और समाजसेवी श्री सुरेश चंद्र पूरणमल जैन की सराहना की। उन्होंने कहा कि जैन समाज से होने के बावजूद श्री जैन जिस तरह सनातन धर्म के इतने बड़े आयोजन करवा रहे हैं, वह वंदनीय है। नागर जी ने इस पुनीत कार्य के लिए उन्हें विशेष रूप से साधुवाद दिया।
इस धार्मिक आयोजन में थांदला, रायपुरिया, अलीराजपुर और रंभापुर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आयोजन समिति के सदस्यों, जिनमें सुरेश चंद्र पूरणमल जैन, सीमा जैन, राजेश रिंकू जैन और मंदिर के महंत दिलीप दास जी महाराज शामिल हैं, ने भक्तों से प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे तक कथा श्रवण करने और उसके बाद भंडारे में प्रसादी ग्रहण करने का आग्रह किया है।