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May 13, 2026, 6:19 pm
KHABAR : एमपी में शिक्षकों को टीईटी पास करना ही होगा, सुप्रीम कोर्ट बोला- बिना परीक्षा कोई शिक्षक नहीं बन सकता, जो छूट मिलनी थी, मिल चुकी, पढे़ खबर

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मध्य प्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पात्रता परीक्षा में जो भी छूट दी जानी थी, वह पहले ही दी जा चुकी है। ऐसे में अब होने वाली किसी भी भर्ती में पात्रता परीक्षा पास किए बिना कोई भी शिक्षक नियुक्त नहीं किया जा सकता।


पुनर्विचार याचिका राज्य सरकार के साथ मध्य प्रदेश और देशभर के अन्य राज्यों के शिक्षा संगठनों की ओर से दायर की गई थी। याचिकाओं में 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को परीक्षा से छूट देने की मांग की गई थी।


पांच साल की छूट पहले ही दी जा चुकी
हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि वर्ष 2017 में नियम लागू होने के बाद पांच साल की छूट पहले ही दी जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा तय किए गए नियमों का पालन सभी राज्यों और शिक्षकों को करना होगा।


सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और अधिवक्ताओं की ओर से विभिन्न दलीलें पेश की गईं, लेकिन फिलहाल शिक्षकों को राहत मिलने की संभावना कम नजर आ रही है। हालांकि, 70 से अधिक याचिकाओं पर बुधवार शाम तक सुनवाई जारी रही। ऐसे में मामले में अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है।


कोर्ट का रुख सकारात्मक नहीं लगा- शिक्षक संघ
जनजातीय कल्याण शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर ने कहा- हमारे संगठन ने भी एक याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान वह खुद मौजूद थे। अधिवक्ताओं के मजबूत तर्कों के बावजूद कोर्ट का रुख सकारात्मक नहीं लगा।


दरअसल, यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 1998 से 2009 के बीच बिना टीईटी नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए थे। ये नियुक्तियां राज्य सरकार की मेरिट प्रक्रिया के तहत हुई थीं। मध्य प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की संख्या करीब डेढ़ लाख बताई जा रही है।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- परीक्षा में फेल हुए तो नौकरी जा सकती है
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा था कि यदि कोई शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं करता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा आदेश जारी होने पर प्रदेशभर के शिक्षक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था।


शिक्षक संगठनों ने फैसले के खिलाफ आंदोलन भी किया। उन्होंने मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट से आदेश पर पुनर्विचार की मांग की। पिछले महीने मध्य प्रदेश सरकार, शासकीय शिक्षक संगठन, राज्य कर्मचारी संघ और कई शिक्षा संगठनों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी।

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