चित्तौड़गढ़। विश्व की सबसे बड़ी जिंक उत्पादक कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और पशु कल्याण के लिए किए जा रहे अपने प्रयासों की जानकारी साझा की। कंपनी की सामुदायिक योजना ‘समाधान’ के तहत राजस्थान में अब तक 4.1 लाख से अधिक पशुधन लाभान्वित हो चुके हैं।
कंपनी ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के उपचार, पेयजल व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण तथा वैज्ञानिक तरीकों से जैव विविधता संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में उदयपुर स्थित 369 हेक्टेयर में फैले बाघदड़ा मगरमच्छ संरक्षण रिजर्व के विकास एवं संरक्षण का कार्य भी शुरू किया गया है।
पशु स्वास्थ्य और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हिंदुस्तान जिंक पिछले 10 वर्षों से अपने संचालन क्षेत्रों के आसपास स्थित गांवों में पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर रही है। ‘समाधान’ परियोजना के तहत पशुपालकों को निःशुल्क उपचार, टीकाकरण तथा पशुपालन संबंधी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ने के साथ पशुधन भी स्वस्थ रह रहा है। यह योजना किसानों को आधुनिक एवं सुरक्षित पशुपालन और कृषि पद्धतियों की जानकारी देने में भी सहायक साबित हो रही है।
गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए गांवों में पानी की टंकियां और पात्र रखे जा रहे हैं। इसके अलावा रात के समय सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं से आवारा पशुओं को बचाने के लिए उनके गले में परावर्तक पट्टियां लगाई जा रही हैं, ताकि वाहन चालकों को वे दूर से दिखाई दे सकें।
हिंदुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण और जीव-जंतुओं की सुरक्षा कंपनी की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। कंपनी प्रकृति संरक्षण और ग्रामीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा वैश्विक मानकों का पालन करते हुए पर्यावरण सुरक्षा में योगदान दे रही है।
कंपनी ने राजस्थान सरकार के साथ 5 करोड़ रुपये का समझौता ज्ञापन किया है। इसके तहत उदयपुर के बाघदड़ा मगरमच्छ रिजर्व का विकास किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत पौधारोपण, जल संरक्षण के लिए चेक डैम एवं तालाब निर्माण, पर्यटकों के लिए पैदल मार्ग तथा बैठने की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। रिजर्व के पूर्ण विकसित होने पर यहां मगरमच्छों के साथ 200 से अधिक पक्षी प्रजातियों को सुरक्षित आवास मिल सकेगा।
हिंदुस्तान जिंक अंतरराष्ट्रीय संस्था अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही है। कंपनी का लक्ष्य ‘नो नेट लॉस’ है, अर्थात औद्योगिक गतिविधियों से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव की भरपाई पौधारोपण एवं अन्य संरक्षण गतिविधियों के माध्यम से की जा रही है।
यह पहल दर्शाती है कि उद्योग संचालन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और पशु कल्याण को भी समान प्राथमिकता दी जा सकती है।