नीमच। पिछले ढाई वर्षों में औद्योगिक विकास की तेज रफ्तार ने नीमच जिले को मालवा के उभरते औद्योगिक शक्ति केंद्र के रूप में नई पहचान दिलाई है। “इंडस्ट्रियल वाइब्रेंट हब” के रूप में विकसित हो रहे जिले में निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए आयाम स्थापित हुए हैं।
जिले के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र झांझरवाड़ा में 100 प्रतिशत प्लॉट आवंटित हो चुके हैं। यहां 200 से अधिक प्लॉट्स पर 44 औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जिनसे 2500 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
टेक्सटाइल और डेनिम सेक्टर ने जिले की औद्योगिक प्रगति को नई गति दी है। स्वराज सूटिंग्स प्राइवेट लिमिटेड की 400 करोड़ रुपये की डेनिम यूनिट में 400 से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है, जबकि विश्वेश्वरा डेनिम प्राइवेट लिमिटेड ने 135 करोड़ रुपये का निवेश किया है। मोरवन में सुविधि रेयांस की 329 करोड़ रुपये की टेक्सटाइल मिल निर्माणाधीन है, जिससे करीब 1500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
ग्रीन एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में भी जिले ने तेजी से विस्तार किया है। मालवा पेट्रो प्रोडक्ट्स, एमपी ग्रीनरिज़, ओसवाल एथेनॉल और धनुका बायोटेक जैसी इकाइयों ने ग्रीन इंडस्ट्री को बढ़ावा दिया है, वहीं जैन एग्रो प्रोडक्ट्स और इनाया एग्रो फूड्स जैसी इकाइयों ने कृषि आधारित उद्योगों को नई दिशा दी है।
बढ़ती औद्योगिक मांग को देखते हुए एमपीआईडीसी द्वारा चीताखेड़ा में 186 हेक्टेयर क्षेत्र में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। राजस्थान और गुजरात की सीमा से सटे होने के कारण नीमच तेजी से लॉजिस्टिक और टेक्सटाइल हब के रूप में उभर रहा है।
एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक राजेश राठौड़ ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उद्योग हितैषी नीतियों और “रोजगार आधारित विकास” मॉडल के कारण जिले में नए निवेश लगातार बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में नीमच टेक्सटाइल, ग्रीन एनर्जी और एग्री-बेस्ड इंडस्ट्री का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।