खरगोन। जिले के भीकनगांव में वन विभाग की सीए योजना जलग्रहण क्षेत्र उपचार योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्षैत्र की विकास परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों में मृदा अपरदन को रोकना और जल संरक्षण को मजबूत करना है। इसी उद्देश्य से वन विभाग की भीकनगांव बीट के ग्राम केदवा जागीर में सीए योजना के तहत् लगभग 48 लाख रूपए की लागत से 20 हज़ार पौधों का रोपण कार्य वर्ष 2025-26 में किया गया था लेकिन पौध रोपण के बाद के बाद वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही के कारण रोपीत लगभग सभी 20 हज़ार पौधे भीषण गर्मी की भेंट चढ़ कर सुख रहें हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग द्वारा रोपित पौधे की सुरक्षित देख-रेख तथा सिंचाई व्यवस्था नहीं करने के कारण रोपीत पौधे सुख रहें हैं तथा शासन के लाखों रूपए भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहें हैं। आपकों बता दें कि ग्राम केदवा जागीर में लगभग 48 लाख रुपए की लागत से 20 हज़ार पौधों के वनीकरण तथा सुरक्षित देख-रेख के लिए दो वर्षीय कार्ययोजना तैयार कर शासन स्तर से स्वीकृति दी गयी है।
सीए योजना क्या है?
जब किसी वन या पहाड़ी क्षेत्र में कोई बड़ी विकास परियोजना शुरू की जाती है, तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इस नुकसान की भरपाई और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए यह योजना बनाई जाती है। मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने के लिए चेक डैम, कंटूर ट्रेंच और वनीकरण (वृक्षारोपण) किया जाता है। भूमिगत जल स्तर को सुधारने और पानी के प्राकृतिक स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए जल संचयन संरचनाएं बनाई जाती हैं। काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति वनीकरण किया जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के पौधे लगाकर पर्यावरण को हरा-भरा रखा जाता है। सीए योजना सीधे तौर पर पर्यावरण सुरक्षा और स्थानीय जल स्रोतों को टिकाऊ बनाए रखने के लिए अनिवार्य रूप से लागू की जाती है। इस योजना का संचालन वन विभाग द्वारा किया जाता है।