चित्तौड़गढ़। संथारा विशेषज्ञ धर्ममुनि जी मसा की आज्ञानुवर्ती धर्मसिंहनी महासाध्वी धैर्य प्रभा जी मसा ने गुरुवार को श्री जैन दिवाकर स्वाध्याय संस्थान भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ध्यान स्वयं की स्वयं में की जाने वाली अंतर यात्रा है। इस अंतर यात्रा के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर झांककर परमात्मा का साक्षात्कार कर सकता है।
महासाध्वी धैर्य प्रभा जी मसा ने एक दृष्टांत के माध्यम से कहा कि एक व्यक्ति प्रभु दर्शन की इच्छा लेकर जंगलों, मंदिरों, आकाश और ब्रह्मांड के कोने-कोने तक पहुंचा, लेकिन उसे कहीं भी प्रभु के दर्शन नहीं हुए। अंततः एक ज्ञानी ने उसे बताया कि जिसे वह बाहर खोज रहा है, वह उसके भीतर, उसकी आत्मा में ही विद्यमान है।
उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान के माध्यम से स्वयं को पहचानना ही वास्तविक साधना है। जब व्यक्ति स्वयं को जान लेता है, तभी अनंत सुख की प्राप्ति संभव होती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने भूतकाल से अनुभव और भविष्य से आशा ग्रहण करनी चाहिए, तभी उसके जीवन में कभी अंधकार नहीं आएगा। धर्मसभा का संचालन संघ अध्यक्ष किरण डांगी ने किया।
इस अवसर पर श्री जैन दिवाकर स्वाध्याय संस्थान के अध्यक्ष सुरेश कुमार सिंघवी एवं महामंत्री पारसमल डांगी ने बताया कि धर्मसिंहनी महासाध्वी धैर्य प्रभा जी मसा आदि ठाणा का आगामी चातुर्मास दिवाकर नगरी डूंगला में होगा। उन्होंने बताया कि महासती वृंद अपनी शिष्याओं के साथ मध्यप्रदेश, कोटा, बिजौलिया, बेगूं एवं पारसोली होते हुए गत दिनों चित्तौड़गढ़ के मीरानगर पहुंचे, जहां श्रमण संघीय उपाध्याय प्रवर गौतम मुनि जी मसा एवं वैभव मुनि जी मसा के सान्निध्य में प्रवचन तथा विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।