नीमच। यौमे आशूरा के अवसर पर शुक्रवार को शहर में पारंपरिक ताजिया जुलूस पूरे अकीदत, अनुशासन और गमगीन माहौल के बीच निकाला गया। बीती रात से ही शहर के विभिन्न क्षेत्रों से ताजिए अपने-अपने मुकामों से रवाना होकर निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए मुख्य जुलूस में शामिल हुए।
श्या हुसैनश् की सदाओं, नौहों और मरसियों के बीच बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने जुलूस में शामिल होकर शोहदाए कर्बला को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया। पूरे शहर में गम-ए-कर्बला की याद में श्रद्धा और शोक का वातावरण बना रहा।
नीमच की ताजियादारी लगभग 200 वर्षों की गौरवशाली परंपरा मानी जाती है। यह शहर की गंगा-जमुनी तहज़ीब, सांप्रदायिक सौहार्द और साझा सांस्कृतिक विरासत की जीवंत मिसाल है। हर वर्ष की तरह इस बार भी विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों ने ताजियों के स्वागत, सबील, लंगर एवं तबर्रुक की व्यवस्था कर भाईचारे और सद्भाव का संदेश दिया।
जुलूस के साथ चल रहे अखाड़ों के कलाकारों ने पारंपरिक एवं हैरतअंगेज़ करतबों का प्रदर्शन कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं मार्ग में जगह-जगह सबीलों के माध्यम से श्रद्धालुओं को पेयजल एवं तबर्रुक वितरित किया गया।
पूरे जुलूस के दौरान इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके 72 वफ़ादार साथियों की महान कुर्बानी को याद किया गया। श्रद्धालुओं ने कर्बला के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
ताजिया जुलूस को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस एवं प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई। प्रमुख मार्गों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा तथा वरिष्ठ अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।