सरवानिया महाराज। राणावत पटेल परिवार की पुत्रवधू सुमन कुंवर 55 साल को तनीक भी यह पता नहीं होगा कि जिस मोक्ष की प्राप्ति के लिए वो साथी महिलाओं के साथ रावला मंदिर में श्री राम जानकी की शरण में बैठकर हरि किर्तन कर रही है वही उनका आखिरी समय है और वही मोक्ष हो जायेगा ।
जी हां हम बात कर रहे हैं राणावत समाज की सुमन कुंवर की जो भक्ति गीतों की धुन में मगन होकर भजन कीर्तन कर रही थी कि अचानक से मंदिर में ही मौत हो गई। बेहद धार्मिक प्रवृत्ति और शांत स्वभाव वाली सुमन कुंवर राणावत को भक्ति का रंग ऐसा चढ़ा की सुमिरन करते करते श्री हरि के चरणों में सदा सदा के लिए लीन हो गई । निश्चित रूप से राणावत के निधन से जंहा परिवार में शोक की लहर है वहीं शहर में निर्जला एकादशी पर व्रत में हरि किर्तन के दौरान प्रभु शरणं की चर्चा भी आम है।
न.प के वार्ड नंबर 6 निवासी स्व. कालू सिंह राणावत (पटेल ) की पुत्रवधु, फूलसिंह राणावत की धर्मपत्नी एवं राजपाल सिंह, वख्तावर सिंह (मड़ू बन्ना) की पूज्य माताजी व दीपेश सिंह की बड़ी माता तथा जुझार सिंह की भाभीसा सुमन कुंवर राणावत का गुरुवार निर्जला एकादशी को सांयकाल आकस्मिक निधन हो गया ।
बैण्ड बाजों के साथ निकली अंतिम यात्रा-
वैकुंठ धाम की तरफ़ जीवन के चक्र से मुक्ति पाकर मरणोपरांत सुमन कुंवर राणावत की शुक्रवार प्रातः 9.00 बजे अंतिम यात्रा बैण्ड बाजों के साथ रावला चोक से निकली जिसमें बड़ी संख्या में राणावत राजपूत समाजजनों तथा शहरवासियों ने भाग लेकर राणावत को श्रद्धांजलि दी । कहा जाता है कि एकादशी के दिन व्रत का संयोग हो और हरि कीर्तन करते हुए यदि किसी की मौत हो जाए तो ऐसा व्यक्ति सीधा मोक्ष को प्राप्त कर जाता है। हमारे सनातन धर्म के शास्त्रों में ऐसी मृत्यू को सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
सुमन कुंवर राणावत की अंत्येष्टि आमली भाट रोड़ राणावत समाज के मुक्ति धाम महासतिया जी में विधि विधान के साथ की गई जंहा उनके पुत्रों ने उन्हें मुखाग्नि दी ।
घर के सामने ही मंदिर पर था कीर्तन-
निर्जला एकादशी गुरुवार 25 जुन को समाज कि महिलाओं का रावला मंदिर श्री राम जानकी पर भजन कीर्तन का आयोजन था जिसमें राणावत राजपूत समाज की लगभग 40 माताएं बहनें भजन कीर्तन कर रही थी, की इस दौरान ही सुमन कुंवर राणावत को दिल का दौरा पड़ा और पलक झपकते ही मौत हो गई।