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June 28, 2026, 12:01 pm
KHABAR : पेड़ के नीचे पाठशाला, हरदा के आदिवासी बच्चों का भविष्य आज भी धुंधला, आजादी के 77 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित, पढे़ खबर 

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हरदा। देश आजादी के 77 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है और शिक्षा के अधिकार जैसे कानून लागू हैं, लेकिन हरदा जिले की हंडिया तहसील के ग्राम नानी जोगा की तस्वीर विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यहां प्राथमिक शाला का भवन नहीं होने से आदिवासी बच्चे आज भी पेड़ के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

गांव में करीब 20 से 30 अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्र-छात्राएं खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बच्चों के लिए टाट-पट्टी जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। शिक्षक भी सीमित संसाधनों के बीच एक पुरानी लकड़ी की टेबल पर बैठकर बच्चों को पढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

बारिश, तेज धूप और गर्मी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। हल्की बारिश होते ही कक्षाएं बंद करनी पड़ती हैं, जबकि तेज धूप में खुले में पढ़ाई करना बच्चों के लिए मुश्किल हो जाता है।

मामले को लेकर जयस संगठन ने नाराजगी जताई है। संगठन का कहना है कि सरकार शिक्षा और आदिवासी विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन नानी जोगा के बच्चों को आज तक एक स्कूल भवन तक उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वादे करते हैं, लेकिन बाद में शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों की अनदेखी की जाती है।

जयस के जिला प्रभारी राकेश ककोडिया ने प्रशासन को 15 दिन के भीतर बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने और तीन माह के भीतर स्थायी स्कूल भवन की स्वीकृति देने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर संगठन आंदोलन करेगा। उनका कहना है कि आदिवासी समाज अब अपने बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा।

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