प्रदेश में लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के आधार पर अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नत करने के लिए विभाग वरिष्ठता सूची तैयार कर जल्द से जल्द सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपेंगे।
राज्य सरकार ने पदोन्नति नियमों को लेकर सामान्य पिछड़ा वर्ग कर्मचारी संगठन के विरोध को दरकिनार करते हुए पदोन्नति नियमों के आधार पर यह सूची तैयार करने को कहा है ताकि उच्चस्तरीय फैसले के बाद इस पर एक्शन लिया जा सके।
इसके लिए विभागों से एससी-एसटी और अनारक्षित पदों पर काबिज अफसरों की सूची मांगी गई है।
लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के विरोध के बीच सामान्य प्रशासन विभाग ने इस मुद्दे पर आज बीस विभागों के अफसरों की बैठक में यह लिस्ट तैयार करने के लिए कहा है।
एक साल पहले जारी पदोन्नति नियमों के मामले में हाईकोर्ट से फैसला नहीं आ पाने के बाद एक्टिव सरकार ने कहा है कि चूंकि नियमों में कहा गया है कि हर साल जुलाई और जनवरी के महीने में वरिष्ठता सूची तय होगी। इसलिए विभाग इसके आधार पर लिस्ट तैयार करेंगे। यह सभी विभाग वर्ष 2029 तक की स्थिति में अधिकारियों की वरिष्ठता सूची तैयार करेंगे। इसके बाद पदोन्नति आदेश जारी करते समय इन्हीं अधिकारियों को प्रमोशन देने का काम किया जाएगा।
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने कहा है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के नियम-5 के अंतर्गत विभिन्न संवर्गों के लिए X ( अनुसूचित जाति) एवं Y (अनुसूचित जनजाति) निर्धारण के संबंध में कार्यवाही की जाना है। पदोन्नति को लेकर बुलाई गई इस बैठक में पदोन्नति नियमों को लेकर बैठक में शामिल हुए उप सचिव स्तर के अफसरों में असमंजस की स्थिति रही। अधिकांश अफसरों का कहना है कि वे तो जीएडी के निर्देश के आधार पर 2029 तक की वरिष्ठता की सूची अभी तैयार करा रहे हैं और जीएडी को जल्दी ही सौंपेंगे।
इसके बाद जीएडी की ओर से जो भी निर्देश दिए जाएंगे, उसके आधार पर काम करेंगे। अफसरों ने यह जरूर साफ किया कि 2025 के नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा, जो नियम तय किए गए हैं, उसी आधार पर सूची तैयार कराई जा रही है। सरकार के इस फैसले पर सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था (SPEAK) अपना रुख जल्द स्पष्ट करेगा। संगठन ने रविवार को बैठक करके सरकार के प्रस्तावित लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025 पर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि नए नियम लागू होने से 2016 से लंबित पदोन्नति विवाद का समाधान नहीं होगा, बल्कि कई कर्मचारियों के सेवा हित प्रभावित होंगे।
स्पीक ने सरकार से नियमों में संशोधन की मांग करते हुए कई संवैधानिक और प्रशासनिक सवाल भी उठाए हैं। संस्था के अध्यक्ष डॉ. केएस तोमर ने कहा कि सरकार पदोन्नति मामले में न्यायालय का फैसला आने से पहले ही जल्दबाजी में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कर रही है। तोमर ने कहा कि साल 2016 से पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित रही है।
यदि नए नियम केवल साल 2025 से लागू किए जाते हैं तो 2016 से 2025 के बीच प्रभावित कर्मचारियों तथा इस अवधि में सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारियों के हितों की अनदेखी होगी।
संगठन ने दावा किया कि नए नियमों में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिनसे पदोन्नति प्रक्रिया में सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों को नुकसान हो सकता है।
इनमें वरिष्ठता निर्धारण, कॉमन विचारण सूची, आरक्षित वर्ग के अधिकारियों को अनारक्षित रिक्तियों में विचारण, प्रतीक्षा सूची की व्यवस्था तथा बैकलॉग पदों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने जैसे प्रावधान शामिल हैं।