मंदसौर। जिले में खरीफ 2026 फसल की बुवाई प्रारंभ हो चुकी है। इस वर्ष जिले में लगभग 3,20,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी प्रस्तावित है, जिसमें से लगभग 2,70,000 हेक्टेयर में सोयाबीन फसल की बुवाई की जाएगी।
उप संचालक कृषि रविन्द्र मोदी ने बताया कि वर्तमान में अल नीनो के प्रभाव के चलते वर्षा की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों से खेती करने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान सोयाबीन की बुवाई रेज्ड बेड, ब्रॉड बेड फरो (BBF) एवं रिज-एंड-फरो तकनीक से करें, जिससे अधिक वर्षा की स्थिति में खेत से अतिरिक्त पानी का निकास हो सके तथा कम वर्षा में नमी सुरक्षित रहे। इससे फसल को जलभराव एवं सूखे दोनों परिस्थितियों से सुरक्षा मिलती है और उत्पादन बेहतर होता है।
कृषि विभाग ने किसानों को अधिक उत्पादन के लिए उन्नत सोयाबीन किस्में जैसे एनआरसी-131, एनआरसी-150, एनआरसी-157, जेएस-2172, जेएस-20-98, जेएस-20-116, जेएस-23-03, जेएस-23-05, आरवीएस-2001-4, आरवीएसएम-11-35 सहित अन्य अनुशंसित किस्मों के उपयोग की सलाह दी है।
साथ ही किसानों को प्रमाणित एवं उपचारित बीज का उपयोग, अनुशंसित बीज दर, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर खरपतवार नियंत्रण तथा कीट एवं रोग प्रबंधन अपनाने की अपील की गई है।
कृषि विभाग ने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से सोयाबीन की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है तथा उत्पादन लागत में कमी के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि संभव है।
विभाग ने किसानों से यह भी आग्रह किया है कि वे कृषि विज्ञान केंद्र, उद्यानिकी महाविद्यालय तथा निकटतम कृषि कार्यालय से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर ही खेती करें।
इसके अलावा, वर्षा में देरी की स्थिति को देखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि वे उड़द, मूंग एवं तिल जैसी कम अवधि एवं कम पानी में उगने वाली फसलों का चयन करें, जो कम लागत में बेहतर लाभ दे सकती हैं।