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August 13, 2026, 1:59 pm
KHABAR : एमपी में अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी होंगे आउटसोर्स, रीवा-देवास-गुना के 18 सीएचसी से शुरू होगा 5 साल का पायलट प्रोजेक्ट, पढे़ खबर

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भोपाल। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और डॉक्टरों एवं विशेषज्ञों की कमी दूर करने के उद्देश्य से अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) का संचालन आउटसोर्स सिस्टम से करने की तैयारी है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट के पहले चरण में रीवा, देवास और गुना जिले के कुल 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को शामिल किया गया है। यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर पांच साल के लिए लागू की जाएगी।


इसके तहत चयनित निजी सेवा प्रदाता एजेंसी या ट्रस्ट को अस्पतालों के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जाएगी। एजेंसी को हाउसकीपिंग, सुरक्षा व्यवस्था के साथ निर्धारित मापदंडों के अनुसार डॉक्टरों एवं विशेषज्ञों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी।


‘जहां है, जैसा है’ की तर्ज पर सौंपे जाएंगे CHC
पायलट प्रोजेक्ट के तहत अस्पतालों का मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर ‘जहां है, जैसा है’ की नीति के तहत निजी सेवा प्रदाता को सौंपा जाएगा। हालांकि मरीजों को मिलने वाली सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित नहीं होंगी। सरकारी दवाइयां, टीके, ओपीडी-आईपीडी और सर्जरी से संबंधित आवश्यक सामग्री स्वास्थ्य विभाग की नीति के अनुसार उपलब्ध कराई जाएगी।


सरकारी स्टाफ को मिलेगा ट्रांसफर का विकल्प
इन अस्पतालों में पहले से पदस्थ सरकारी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को एक बार जिले के अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्थानांतरण का विकल्प दिया जाएगा। जो कर्मचारी ट्रांसफर का विकल्प नहीं चुनेंगे, उनके वेतन का भुगतान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के माध्यम से किया जाएगा।


कांग्रेस ने जताई थी निजीकरण पर आपत्ति
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी हाथों में सौंपे जाने के फैसले को लेकर कांग्रेस पहले ही आपत्ति दर्ज करा चुकी है। जुलाई 2026 में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कांग्रेस के आदिवासी विधायकों के साथ राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर CHC, छात्रावासों और ITI को निजी हाथों में सौंपने पर विरोध जताया था।

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