नीमच। पारंपरिक कृषि और व्यापार आधारित अर्थव्यवस्था के साथ नीमच अब तेजी से औद्योगिक केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। पिछले दो वर्षों में जिले में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से निवेश, उत्पादन, उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर सामने आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों और औद्योगिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने के प्रयासों का असर जिले में दिखाई दे रहा है।
पिछले दो वर्षों में जिले में 350 से अधिक नई एमएसएमई इकाइयां स्थापित हुई हैं। इनमें 350 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है और 8 हजार से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का असर परिवहन, निर्माण, स्थानीय आपूर्ति, व्यापार और सेवा क्षेत्र पर भी पड़ा है।
नए औद्योगिक क्षेत्रों से बढ़ेंगी संभावनाएं-
जिले में औद्योगिक अधोसंरचना के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। सगराना और पीताखेड़ी में नए औद्योगिक क्षेत्रों को मंजूरी मिल चुकी है। यहां निवेशकों के लिए 400 से अधिक औद्योगिक भूखंड उपलब्ध होंगे। इससे आने वाले समय में नए उद्योगों की स्थापना और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
राज्य की क्लस्टर विकास योजना के तहत केसरपुरा एवं सगराना क्लस्टर तैयार हो चुके हैं, जबकि ग्राम दारू में क्लस्टर विकास का कार्य जारी है। क्लस्टर आधारित विकास से स्थानीय उद्यमियों को साझा अधोसंरचना, बाजार और तकनीकी सुविधाओं का लाभ मिलने की संभावना है।
7 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव-
नीमच के औद्योगिक भविष्य को लेकर बड़े निवेशकों की रुचि भी बढ़ी है। एमपीआईडीसी द्वारा गोल्ड क्रेस्ट सीमेंट, सनलाइट एल्कोलाइट, स्वराज शूटिंग, सुविधा रियॉन, विश्वेश्वरया डेनिम्स, बाबजी इंडस्ट्री, डिटलमाइंड इंडिया, सोनियाना टेक्सटाइल, धानुका बायोटेक, बिगासी रिन्यूवल और शर्मा केमिकल्स सहित विभिन्न प्रस्तावित औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया की गई है।
इन प्रस्तावित इकाइयों से 7 हजार करोड़ रुपये से अधिक का संभावित निवेश और 6 हजार से अधिक नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। विभिन्न क्षेत्रों में निवेश से जिले के औद्योगिक आधार में विविधता आने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
एमएसएमई को मिला वित्तीय संबल-
स्थानीय युवाओं और उद्यमियों को उद्योग एवं व्यवसाय शुरू करने तथा मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में एमएसएमई इकाइयों को बैंकों के माध्यम से 1081 करोड़ रुपये, जबकि वर्ष 2025-26 में 1276 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया।
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत वर्ष 2023-24 से अब तक 812 हितग्राहियों को 67.34 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है। इससे युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ रहे उद्यमी-
औद्योगिक विकास को प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाने के लिए उद्यमियों को तकनीकी प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर के बाजारों से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। रैम्प योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के चार उद्यमियों को सीएफटीआरआई, मैसूर भेजा गया, जबकि एक उद्यमी ने कोयंबटूर में आयोजित प्लास्टिक एक्सपो में सहभागिता की।
मोरका (जावद) औद्योगिक क्षेत्र में 15 उद्यमियों को ऑनलाइन एवं पारदर्शी प्रक्रिया से औद्योगिक भूखंड आवंटित किए गए हैं। इससे भूमि आवंटन में पारदर्शिता के साथ निवेशकों के विश्वास को भी मजबूती मिली है।
जिला प्रशासन की सक्रिय भूमिका-
कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने, विभागीय समन्वय और उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित निराकरण पर काम किया जा रहा है। प्रशासन का जोर उद्योगों की स्थापना को आसान बनाने, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर है।
औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरता नीमच-
जिले में 350 से अधिक नई औद्योगिक इकाइयां, 350 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और 8 हजार से अधिक रोजगार अब तक की तस्वीर सामने रखते हैं। वहीं 7 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावित निवेश और 6 हजार से अधिक संभावित रोजगार आने वाले औद्योगिक विस्तार की संभावनाओं को दर्शाते हैं।
औद्योगिक अधोसंरचना के विस्तार, एमएसएमई को वित्तीय सहयोग, क्लस्टर विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और पारदर्शी भूखंड आवंटन जैसे प्रयासों से नीमच की औद्योगिक गतिविधियों को नई दिशा मिल रही है। निवेश और रोजगार के लिहाज से जिला तेजी से नए औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।