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September 12, 2026, 2:00 pm
NEWS : डिजिटल अरेस्ट ठगी से सावधान, फर्जी नोटिस से लेकर खाते खाली करने तक का खेल, पढे़ रेखा खाबिया की खबर

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जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को बढ़ते साइबर अपराधों और खासकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान किया है। पुलिस के अनुसार साइबर ठग खुद को सीबीआई, ईडी, एटीएस, कस्टम, आरबीआई या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और फर्जी वारंट, सम्मन व नोटिस भेजकर लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह के अनुसार ठग विशेष रूप से सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों, डॉक्टरों, प्रोफेसरों और वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। ठग फोन, व्हाट्सऐप कॉल या वीडियो कॉल के जरिए संपर्क कर पीड़ित के आधार कार्ड, बैंक खाते या सिम का इस्तेमाल किसी अपराध में होने की बात कहते हैं। इसके बाद हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकवाद की फंडिंग जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देकर गिरफ्तारी का डर पैदा किया जाता है।

वीडियो कॉल पर बनाते हैं फर्जी पुलिस स्टेशन
ठग पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर करते हैं। कई बार वीडियो कॉल में पुलिस स्टेशन या सीबीआई कार्यालय जैसा सेटअप दिखाया जाता है। पुलिस अथवा जांच एजेंसी की वर्दी पहने व्यक्ति भी स्क्रीन पर दिखाई देते हैं। इसके बाद व्हाट्सऐप पर फर्जी गिरफ्तारी वारंट या न्यायालय के नोटिस भेजकर पीड़ित को डराया जाता है।

ठग पीड़ित को परिवार से संपर्क करने से रोकते हैं और यह तक कहते हैं कि उसके घर के बाहर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात हैं। इस तरह डर का माहौल बनाकर पीड़ित को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया जाता है।

वेरिफिकेशन के नाम पर ट्रांसफर कराते हैं रकम
डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठग पीड़ित से बैंक खाते, एफडी और अन्य वित्तीय संसाधनों की जानकारी हासिल करते हैं। इसके बाद उसकी जमा राशि को कथित तौर पर अपराध से जुड़ा धन बताते हुए ‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता है। रकम ट्रांसफर होते ही ठग उसे दूसरे खातों में भेजकर या अन्य माध्यमों से निकाल लेते हैं।

फर्जी नोटिस की जांच के लिए ‘अभय’ पोर्टल
राजस्थान पुलिस ने बताया कि संदिग्ध पुलिस, न्यायालय या जांच एजेंसी के नोटिस और वारंट की वास्तविकता जांचने के लिए सीबीआई द्वारा ‘अभय’ पोर्टल शुरू किया गया है। यह एआई आधारित चैटबॉट है, जो संदिग्ध नोटिस और फर्जी वारंट की जांच में सहायता करता है।

डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए क्या करें?
कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे की मांग नहीं करती।
ऐसी कॉल आए तो घबराएं नहीं और तुरंत कॉल काट दें।
परिवार के सदस्यों को तुरंत पूरी जानकारी दें।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई एप्लीकेशन डाउनलोड या स्क्रीन शेयर न करें।
आधार, पैन, बैंक डिटेल, ओटीपी, पिन और पासवर्ड किसी से साझा न करें।
संदिग्ध नोटिस या वारंट की जांच अभय पोर्टल पर करें।
ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।

राजस्थान पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यदि कोई व्यक्ति वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी की धमकी देता है और पैसे मांगता है, तो यह साइबर ठगी का संकेत हो सकता है।

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