बालाघाट। शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देश पर हुआ। इसमें न्यायालय से जुड़े समझौता योग्य मामलों के अलावा कई विभागों से जुड़े मामले भी रखे गए थे।
हालांकि, जिला अधिवक्ता संघ के बुलावे पर अधिवक्ताओं ने नेशनल लोक अदालत का बहिष्कार कर दिया। उन्होंने रैली निकाली और न्यायालय के सामने प्रदर्शन भी किया। अधिवक्ताओं ने न्यायालयीन कार्य से लेकर लोक अदालत के किसी भी काम में हिस्सा नहीं लिया।
जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष प्रवेश मलेवार ने बताया कि नेशनल लोक अदालत में समझौता योग्य मामलों को हल करने में अधिवक्ताओं की भूमिका अहम होती है। लेकिन अधिवक्ताओं के नहीं पहुंचने पर समाजसेवियों को इसमें शामिल करने की बात कही जा रही थी। मलेवार ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि किन समाजसेवियों को शामिल किया गया है।
पुराना कोर्ट और बार रूम खस्ताहाल
अधिवक्ताओं की नाराजगी का मुख्य कारण बालाघाट का दशकों पुराना न्यायालय और बार रूम है। ये इमारतें काफी खस्ताहाल हो चुकी हैं। न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों को बैठने में परेशानी हो रही है। जर्जर होने के कारण ये इमारतें कभी भी गिर सकती हैं।
जिला अधिवक्ता संघ की कोशिशों से नवीन न्यायालय के लिए 9 एकड़ 87 डिसमिल जमीन का आवंटन हो गया है। लेकिन कई कोशिशों के बाद भी सरकार भवन निर्माण के लिए राशि आवंटित नहीं कर रही है। राशि आवंटन के लिए चीफ जस्टिस और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जरूरी चिट्ठी-पत्री भी की जा चुकी है।
इसके बावजूद, आश्वासन के अलावा अब तक कोई राशि नहीं मिली है। इसी नाराजगी के चलते अधिवक्ताओं ने लोक अदालत का विरोध किया और सभी न्यायालयीन कार्य से दूर रहे। उन्होंने बताया कि यदि इससे भी हमारी मांगे पर विचार नहीं किया जाता है तो भविष्य में अधिवक्ता धरना प्रदर्शन आंदोलन और बालाघाट बंद जैसे बड़े आंदोलन करने से भी पीछे नही हटेगा।