चित्तौड़गढ़। दिगंबर जैन समाज चित्तौड़गढ़ का दस लक्षण पर्युषण महापर्व गुरुवार को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना एवं विधान के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर कीर्ति स्तंभ किला स्थित प्राचीन अतिशयकारी 1008 श्री मल्लिनाथ भगवान दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर विशेष पूजा एवं विधान आयोजित किया गया।
पूजा के बाद गाजे-बाजे के साथ श्रीजी की जल यात्रा निकाली गई, जो किले के मंदिर से होकर नीलबाग नंदीश्वर दीप पहुंची। जल यात्रा में प्रथम श्रावक तनिष जैन और जेनिश जैन को विशेष इंद्र बनाया गया। महिला श्रावक मंगल गीत गाते हुए चल रही थीं, जबकि पुरुष श्रावक श्रीजी के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे।
नीलबाग नंदीश्वर दीप में पूजन के बाद मंगल कलश में जल भरकर जल यात्रा वापस कीर्ति स्तंभ मंदिर पहुंची। यहां कलशाभिषेक कार्यक्रम हुआ। प्रथम कलश के पुण्यार्जक राजकुमार गदिया आदिनाथ परिवार, द्वितीय कलश महेंद्र टोंग्या परिवार, तृतीय कलश चौतन्य कुमार दुगेरिया परिवार और चतुर्थ कलश महावीर जी अजमेरा परिवार सहित कुल 21 पुण्यार्जक परिवारों एवं उपस्थित श्रावकों ने श्रीजी का अभिषेक किया।
इसके बाद श्रीजी की अभिमंत्रित माला की बोली का कार्यक्रम और मंगल आरती आयोजित की गई। दस दिवसीय महापर्व के दौरान मंदिर में उत्तम क्षमा से लेकर उत्तम ब्रह्मचर्य तक दसों धर्मों पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर को आकर्षक रूप से सजाया गया। इस दौरान तपस्वियों ने व्रत एवं उपवास भी किए।
मंदिर कमेटी ने दस लक्षण पर्युषण महापर्व में सहभागिता करने वाले सभी समाजजनों के प्रति अनुमोदना व्यक्त की।