गुना। मानव अधिकार दिवस के अवसर पर आज महिला अधिकार एवं बाल अधिकार विषय पर संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण बोर्ड के मुख्य आतिथ्य एवं सतीश आरोरा अध्यक्ष बाल कल्याण समिति गुना की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। जिसमें अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जलन कर संगोष्ठी का शुभारम्भ किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश शर्मा द्वारा खुले मंच के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं से चर्चा की। जिसमें महिलाओं एवं बालिकाओं द्वारा अपने विचार व्यक्त करते हुये कुछ प्रश्न भी पूछे, जिनका समाधान किया गया तथा अपने उद्बोधन मे महिला एवं बालकों के नैतिक अधिकार, कानूनी अधिकार एवं संवैधानिक अधिकारों के बारे मे जानकारी दी गयी तथा पीडित महिला एवं बच्चों को बिना डर के अपनी बात रखने हेतु प्रेरित किया गया साथ ही किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता की आवश्यकता हो तो वह विधिक सेवा प्राधिकरण बोर्ड कार्यालय में आकर सहायता प्राप्त कर सकती है।
रेखा सक्सैना प्रशासक वन स्टॉप सेन्ट गुना द्वारा घरेलू हिंसा से पीडित महिलाओं के कानूनी अधिकार की जानकारी दी गयी। उन्होंने बताया कि कोई भी घरेलू हिंसा से पीडित महिला वन स्टॉप सेन्टर गुना में आकर कानूनी सहायता व परामर्श प्राप्त कर सकती है। जिला कार्यक्रम अधिकारी डीएस जादौन द्वारा बाल अधिकारों की चर्चा करते हुये बताया कि बालकों को संविधान द्वारा अधिकार प्रदान किये गये है जैसे जीने का अधिकार, विकास का अधिकास, भागीदारी का अधिकार एवं सुरक्षा का अधिकार। सर्वप्रथम बालक की देखरेख की जिम्मेदारी माता पिता की होती है। उनका दायित्व है कि बच्चों को उक्त अधिकार प्राप्त हो। ताकि बच्चों का सम्पूर्ण विकास हो। शासन द्वारा भी बाल अधिकारों के सम्बन्ध मे कानून बनाये गये है। जिनकी सहायता ली जा सकती है।
जिला विधिक सहायता अधिकारी विभुती मिश्रा द्वारा बताया गया कि घरेलू हिंसा से पीडित महिला हमारे कार्यालय में आकर न्यायालय में जाने से पूर्व मध्यस्था हेतु आवेदन कर सकती है। जिसमें दोनो पक्षों को बुलाकर काउंसिलिंग की जाती है तथा बिना किसी न्यायालयीन प्रकरण के निराकरण किया जाता है। उक्त संगोष्ठी में उपस्थित महिला एवं बालिकाओं द्वारा भी चर्चा में भाग लिया गया। इस अवसर पर आरबी गोयल द्वारा अभार व्यक्त किया गया।
इसके साथ ही जवाहर नवोदय विद्यालय गुना में मानवाधिकार दिवस के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि जिला न्यायाधीश/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गुना राकेश कुमार शर्मा द्वारा मानवाधिकार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव योनि में जन्म लेने वाले हर मनुष्य को जन्म के साथ ही जो अधिकार प्राप्त होते हैं वे मानवाधिकार कहलाते हैं। हमारे भारतीय संविधान में नागरिकों को 6 मौलिक अधिकार दिए हैं जो कि मानवाधिकार की श्रेणी में भी आते हैं जैसे कि समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, जीवन जीने का अधिकार, अपने विचारों को अभिव्यक्ति करने का अधिकार धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार शोषण के विरूद्व अधिकार एवं संवैधानिक उपचार का अधिकार यह सभी अधिकार मानव अधिकार की श्रेणी में आते हैं। उक्त शिविर में जिला विधिक सहायता अधिकारी विभूति तिवारी द्वारा महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों पर संक्षिप्त जानकारी दी।