मनासा। गत रात्रि में जिला सहकारिता अधिकारी सहायक आयुक्त संजय आर्य अपनी टीम के साथ पूर्बिया समाज द्वारा दिए जा रहे धरना स्थल पर आये, लेकिन समाजजनों के अधिकारी ने उनसे कहा कि हमने संस्था भंग कर जांच टीम बना दी है। न्यायालय में भी समाजजनों ने केस लगा रखा है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही मनासा थाने पर आवेदन दे दिया है। दोषियों के खिलाफ कार्यवाही कर रजिस्ट्री भी शून्य करवाने की कार्रवाई की जावेगी। साथ यह भी कहा कि समिति रोजगार के लिए बनाई है। उनको संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं है।
इतने में धरने पर बैठे समाजजनांे ने पूछा कि अधिकारी आप तो ये बताओ की हमने आपको दिनांक 25/07/022 को एक शिकायती आवेदन दिया था। उसके बाद पुनः 17/08/022 को नोटरी करवा कर शपथ पत्र के साथ पुनः एक शिकायती आवेदन दिया और बताया कि वर्तमान में जो लोग इस कम्बल हारा बुनकर समिति के पदाधिकारी है वो संस्था की संम्पति बेचने एवं संस्था को नुकसान पहुंचाने का षड्यंत्र रच रहे है। आप इस संस्था को भंग कर देंवे, लेकिन आपके द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई और अंततः परिणाम जनता के सामने है। जिस बात का समाज को डर था, आखिर वो ही हुवा। शिकायती आवेदन देने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई, जिसके परिणाम स्वरूप संस्था के अध्यक्ष ने भू माफियाओ के एक सिंडिकेट के साथ मिलकर करोड़ों की संम्पति कोड़ियों के भाव में बेच दी। इस संम्पति में प्रथम रजिस्ट्री दिनांक 19/09/022 को हुई जो संस्था के अध्यक्ष ने संस्था के सदस्यों के नाम पर करवाई और फिर सदस्यों ने संम्पति को मार्केट के उन लोगों को बेचा, जिन्होंने इस संम्पति को बेचने की पूरी साजिश रची।
सहकारिता अधिकारी संजय आर्य गत रात्रि में पूर्बिया समाजजनों, मीडिया कर्मियों एवं अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में कह रहे थे, यदि यही कार्यवाही समाजजनों की पहली शिकायत पर हो गयी होती तो आज ये करोडो की संम्पति यूं कोड़ियों के भाव नहीं बिकती। अब ये सभी अधिकारी धरना स्थल पर आकर बड़ी बड़ी बाते कर रहे है और बोल रहे है कि आप धरना समाप्त कर दो। हम जांच करके कार्यवाही करेंगे और अब संस्था भी भंग कर दी है। सुनियोजत षड्यंत्र था, जिसमें सहकारिता विभाग के अधिकारी भी मिले हुवे थे, वरना जो कार्यवाही बाद में हुई वो पहले भी तो हो सकती थी।
कौन कहता है कि धरना देने से न्याय नहीं मिलता, यदि न्याय नहीं मिलता तो जिस कार्यवाही की मांग के लिये पूर्बिया समाज जन जिले के सभी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, एवं सभी विभागों में गुहार लगा चुके, लेकिन जनता और समाज से बढ़कर ना कोई सरकार हुई ना कोई विभाग हुवे और यदि न्याय को पाना है तो हर हाल में लड़ना होगा। कोई नहीं सुनेगा, तो न्यायालय तो हर हाल में सुनेगा। फिलहाल तो देखना यह है कि जिस प्रदेश का मुखिया भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे घर का रास्ता दिखा रहा है अब यहां भी कुछ होगा।