सरसी। सरसी-सादाखेड़ी खेत मार्ग पर मानवता और जीव दया का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला, जहां एक बंदर घायल अवस्था में सड़क किनारे तड़पता हुआ मिला। मूक प्राणी की पीड़ा देखकर ग्रामीणों ने संवेदनशीलता का परिचय दिया और बिना समय गंवाए वन विभाग को सूचना दी।
जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और घायल बंदर का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। प्राथमिक उपचार के बाद बंदर को बेहतर चिकित्सा एवं संरक्षण के लिए जीव दया केंद्र भेजा गया, जहां उसकी देखरेख की जा रही है।
इस सराहनीय कार्य में पवन धाकड़ सहित अन्य ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ग्रामीणों की सजगता और समय पर दी गई सूचना के कारण एक बेजुबान जीव को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है। यदि समय रहते सहायता नहीं मिलती तो बंदर की स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों की जागरूकता और सहयोग की प्रशंसा करते हुए कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की सहभागिता भी उतनी ही आवश्यक है। आमजन की तत्परता और विभाग की त्वरित कार्रवाई से ही वन्यजीव संरक्षण के प्रयास सफल हो पाते हैं।
यह घटना समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आई है कि जीव-जंतुओं के प्रति दया, करुणा और संवेदनशीलता हमारी संस्कृति की पहचान है। घायल और असहाय प्राणियों की सहायता कर हम न केवल एक जीवन बचाते हैं, बल्कि प्रकृति संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
ग्रामीणों और वन विभाग की इस संयुक्त पहल ने साबित कर दिया कि जब संवेदनाएं जागृत हों, तो एक बेजुबान जीव की जिंदगी भी बचाई जा सकती है।