उज्जैन। युवा किसान नौकरी के भरोसे न बैठकर खुद ही आत्मनिर्भर बन रहे हैं। इन्हीं युवाओं में से एक हैं उज्जैन के तराना प्रखंड क्षेत्र के नांदेड गांव के रहने वाले राकेश मंडोर, जो कि मिश्रित खेती की राह पर कडकनाथ मुर्गे का फार्म लगाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। 2015-16 में स्नातक पढाई के बाद राकेश ने भी नौकरी के लिए दौड-भाग की थी, तमाम कोशिशों के बाद नौकरी मिली भी तो 2016-2018 तक एच.डी.एफ.सी. बैंक में एक कम बजट की पार्ट टाईम सर्विस। आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हुए अंत में खेती के साथ मुर्गी पालन की योजना बनाई । उन्होंने ठान लिया कि खुद ही अपना रोजगार शुरू करेंगें।
कृषि विभाग के माध्यम से वर्ष 2022-23 में आत्मा योजना अंतर्गत नवाचार घटक के कडक नाथ के 100 चुजे 15-20 दिन के निशुल्क प्राप्त किए। इसके लिए मार्गदर्शन कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री एम.एस.तोमर और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं सहायक तकनीकी प्रबंधक विकासखण्ड तराना के श्री दिनेश डोर ने सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन आत्मा योजना के बारे मे बताया कि किस प्रकार योजना का लाभ ले कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। कृषि अधिकारियों की सलाह पर युवा किसान आज मुर्गी पालन व्यवसाय से जुडकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
कडकनाथ पालन के लाभ-
कडकनाथ पालन व्यवसाय का भविष्य बहुत ही उज्जवल है एवं इसको प्रारम्भ करने में कम निवेश की जरूरत होती है। दूसरे देशी नस्ल के मुर्गों के मुकाबले ये पक्षी सिर्फ चार से पांच महीने में तैयार हो जाता है और बाजार में यह 700-800 रूपये में बिक जाता है। पांच सौ मुर्गियों के फार्म में मुर्गीपालन हर महीने 10 से 12 हजार रूपये कमा सकते है। कडकनाथ का रखरखाव अन्य मुर्गों के मुकाबले आसान होता है, ये कम बीमार हाते हैं और अगर इनका पालन बेकयार्ड तरीके से किया जाये तो इस मुर्गे के खान-पान में कोई ज्यादा खर्च नहीं आता है। यह पक्षी हरे चारे में बरसीम, बाजरा चरी बडे ही चाव से खाते है।
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