भोपाल। राजधानी भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर गुरुवार को एक अलग ही आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। भगवान बुद्ध के परम शिष्यों सारिपुत्र और महामोद्गलायन के पवित्र अस्थि अवशेष जैसे ही भोपाल पहुंचे, वहां मौजूद लोगों ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया।
एयरपोर्ट परिसर कुछ देर के लिए श्रद्धा और भक्ति के रंग में डूब गया। मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग ने इस मौके पर विशेष स्वागत कार्यक्रम रखा था। बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर दर्शन किए और इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने जिस मानवता, शांति और करुणा के प्रवाह को शुरू किया था, उसे आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ा रहे हैं। “आज दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध की आवश्यकता है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का विचार भारत दुनिया तक पहुंचा रहा है।
इस अवसर पर महाबोधि सोसायटी, सांची के पूज्य बान गल उप तिस्स नायक थेरो और बान गल विमल तिस्स थेरो सहित कई गणमान्य संत उपस्थित रहे। अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला ने इसे गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयासों से इन पवित्र अवशेषों को विश्व के बौद्ध देशों तक पहुंचाया जा रहा है।
एक लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
मंगोलिया की राजधानी उलानबातर स्थित गंदन मठ में इन पवित्र अवशेषों को प्रदर्शित किया गया, जहां करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर शुरू हुई इस प्रदर्शनी ने मंगोलियाई बौद्ध अनुयायियों को दुर्लभ आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया।
भारत-मंगोलिया के सांस्कृतिक संबंध हुए मजबूत
यह यात्रा भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों को और सशक्त करने वाली रही। दोनों देशों के बीच बौद्ध विरासत एक मजबूत सेतु का काम करती है। उल्लेखनीय है कि इन पवित्र अवशेषों को इससे पहले केवल थाईलैंड और मंगोलिया में ही सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए भेजा गया है।
एयरपोर्ट पर लगी छायाचित्र प्रदर्शनी
स्वागत कार्यक्रम के दौरान एयरपोर्ट परिसर में एक विशेष फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें भारत से मंगोलिया तक की यात्रा, वहां हुए स्वागत, श्रद्धालुओं की आस्था और गंदन मठ में हुए धार्मिक अनुष्ठानों के दुर्लभ दृश्य प्रदर्शित किए गए।