भोपाल/नई दिल्ली। कांग्रेस नेत्री श्रीमती मधु बंसल ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता Meenakshi Natarajan के राज्यसभा नामांकन पत्र को निरस्त किए जाने के फैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे लोकतंत्र, प्राकृतिक न्याय और संविधान की भावना के खिलाफ बताया है।
मधु बंसल ने कहा कि जिस आधार पर नामांकन निरस्त किया गया है, उसमें न तो कोई एफआईआर दर्ज है, न ही किसी सक्षम न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि हुई है और न ही कोई अंतिम न्यायिक निर्णय आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल प्रारंभिक न्यायिक प्रक्रिया या नोटिस के आधार पर किसी प्रत्याशी को चुनाव से वंचित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
उन्होंने यह भी कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कांग्रेस नेता विवेक तन्खा और अभिषेक मनु सिंघवी ने भी स्पष्ट किया है कि विवादित या अस्पष्ट परिस्थितियों में उम्मीदवार को लाभ मिलना चाहिए, न कि उसे चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जाए।
मधु बंसल ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की भावना का हवाला देते हुए कहा कि नामांकन की जांच निष्पक्ष और न्यायपूर्ण होनी चाहिए तथा तकनीकी या गैर-गंभीर आपत्तियों के आधार पर उम्मीदवारों को बाहर करना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा एक ओर महिला सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर राज्यसभा में महिला उम्मीदवार को अवसर नहीं दिया गया, जबकि कांग्रेस ने एक योग्य महिला नेता को आगे बढ़ाया था।
इस बीच उन्होंने एक संवैधानिक पहलू पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नामांकन जांच प्रक्रिया में किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की वकालत भूमिका रही है तो यह अनुच्छेद 220 के तहत गंभीर संवैधानिक प्रश्न है और इसकी जांच आवश्यक है।
अंत में मधु बंसल ने कहा कि पूरा कांग्रेस परिवार Meenakshi Natarajan के साथ खड़ा है और पार्टी लोकतांत्रिक व संवैधानिक तरीके से इस मुद्दे को उठाती रहेगी।