राजगढ़। उपायुक्त सहकारिता नरेश सिन्हा द्वारा शहरी साख सहकारी संस्थाओं के सदस्यों से आग्रह किया है कि वह संस्थाओं कि लोक-लुभावनी योजनाओं के प्रलोभन में नहीं आएं। ऐसी शहरी साख सहकारी संस्थाओं के सदस्य अपनी रिस्क पर ही राशि जमा करवाएं उपायुक्त सहकारिता द्वारा बताया कि मप्र सहकारी अधिनियम 1960 के अन्तर्गत पंजीकृत शहरी साख संस्थाएं जो अपने सदस्यों से अमानत राशि लेकर सदस्यों को आवश्यकता के अनुरूप पंजीकृत उपविधियों के अनुसार ऋण प्रदान करती हैं एवं यह देखा जा रहा है की ऐसी संस्थाऐं जमाकर्ता सदस्यों की राशि परिपक्व होने पर वापस नहीं की जा रही हैं जो धोखा-धड़ी की श्रेणी में आती हैं।
उन्होंने बताया कि शहरी साख सहकारी संस्थाओं को बैंकिंग कार्य करने के लिए भारतीय रिर्जव बैंक द्वारा जारी बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। लेकिन कुछ संस्थाऐं बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट का उल्लंघन करते हुए बैंकिंग कार्य कर रही हैं। ऐसी समस्त शहरी साख संस्थाओं के सदस्यों को परामर्श दिया गया है कि वह स्वयं के जोखिम पर ऐसी शहरी साख सहकारी संस्थाओं में राशियां जामा कराए। भविष्य में यदि ऐसी शहरी साख सहकारी संस्थाओं द्वारा अपने जमाकर्ताओं की राशियों का भुगतान नहीं किया जाता है तो इस हेतु पंजीयक, संयुक्त पंजीयक, उप पंजीयक, सहायक पंजीयक एवं सहकारिता विभाग का कोई अधिकारी, कर्मचारी जवाबदार नहीं होगा।