नीमच। ग्राम भाटखेड़ा स्थित अडानी विल्मर लिमिटेड की फैक्टरी में 9 अप्रैल 2015 को पानी के टैंक की सफाई करने के दौरान पांच मजदूरों की मौत के मामले में गुरुवार को नीमच न्यायालय ने कंपनी अधिकारियों को दोषी मानते हुए 1-1 साल की सजा व 5-5 लाख रु. के जुर्माने से दंडित किया। तीन साल से कम की सजा होने पर आरोपी जमानत पर बाहर हैं। सहायक जिला अभियोजन अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने मजदूरों को ट्रेनिंग नहीं दी, सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिए थे।
नियमानुसार अनुमति भी नहीं लेने पर अदालत ने यह फैसला दिया है। प्रकरण में शासन की तरफ से पैरवी करने वाले एडीपीओ रितेशकुमार सोमपुरा ने बताया कि घटना वाले दिन कारखाने के ईटीपी वाटर टैंक, जिसमें वेस्ट गाद थी, उसे खाली कर सफाई करने के लिए 5 श्रमिकों को उतारा गया था। टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस के कारण पांचों मजदूर बेहोश हो गए थे। इन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल नीमच लाया गया, जहां पांचों मजदूरों की मौत हो गई थी। कारखाना निरीक्षक सुलक्षिका चौहान, हिमांशु सालोमन एवं पीडी नारया द्वारा घटना के संबंध में कारखाने का निरीक्षण किया गया।
जिसमें उन्होंने पाया कि मजदूरों को कोई सुरक्षा उपकरण प्रदान नहीं किए गए थे। सावधानी की सूचना प्रदर्शित नहीं की गई थी। सुरक्षा संबंधी कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई थी, बिना परमिट काम करवाया जा रहा था। अन्य कारखाना विधि के प्रावधानों का उल्लंघन होना भी पाया गया। जिसका दायित्व कारखाना अधिभोगी यानी कैंपस के प्रमुख और कारखाना प्रबंधक का था। घटनास्थल के निरीक्षण उपरांत कार्यवाही करने के बाद दोनों आरोपीगण के खिलाफ परिवाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
आठ साल तक चला केस रितेशकुमार सोमपुरा ने बताया कि यह केस आठ साल चला। इस दौरान 80 से अधिक सुनवाई हुई। अधिकारियों के बयान हुए। 200 से अधिक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। जिसके आधार पर साबित किया गया कि कंपनी ने मजदूरों को सुरक्षा उपकरण नहीं दिए, उन्हें आवश्यक ट्रेनिंग भी नहीं दी। कारखाना विधि नियमों का उल्लघन करते हुए संचालन किया गया। इस तरह पांच नियमों के उल्लंघन पर न्यायालय ने एक-एक लाख का जुर्माना लगाया। 5-5 लाख के अर्थदंड से दंडित किया। गुरुवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संध्या मरावी ने आरोपी कारखाना अधिभोगी अंगशु पिता बंकू बिहारी मलिक (62), वर्तमान निवासी-अहमदाबाद (गुजरात) एवं कारखाना प्रबंधक गोविंद पिता रामलखन दुबे (56), वर्तमान निवासी-नंदानगर, जिला इंदौर को 1-1 साल सश्रम कारावास व 5-5 लाख के अर्थदंड से दंडित किया। एडीपीओ के अनुसार तीन साल से कम की सजा वाले मामले में तत्काल जमानत मिल जाती है। आरोपी अभी जमानत पर बाहर हैं। अब वे चाहें तो आगे अपील करेंगे।