नीमच। जिले में कक्षा 5 वीं की बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया है। इस रिजल्ट के सामने आते ही 7 गांवों के सैकड़ों बच्चों का भविष्य अंधकार में चला गया। एक साथ इन सभी गांवों के बच्चों को बोर्ड परीक्षा में फेल कर दिया गया और फेल होने का कारण भी बोर्ड परीक्षा में हिंदी के पेपर के स्थान पर पर्यावरण का पेपर थमाना सामने आया है।
नीमच जिले के ग्राम अड़मालिया हायर सेकेंडरी स्कूल जिम्मेदारों की लापरवाही का शिकार हुआ है। यहां विगत दिनों कक्षा 5 वीं की परीक्षा संपन्न हुई थी। परीक्षा की शुरूआत में हिंदी का पेपर होना था। लेकिन पहले ही दिन जिम्मेदारों की गलती ने विद्यार्थियों को तनाव में डाल दिया। यह पेपर हिंदी के बजाय पर्यावरण का निकला। पेपर देखते ही बच्चों ने शिक्षकों को शिकायत की। शिक्षकों ने उच्च अधिकारियों को अवगत कराया। इसके बाद कई परीक्षा केंद्रों पर तो प्रश्न पत्र बदलवा दिए गए, लेकिन यह परीक्षा केंद्र लापरवाही का शिकार हो गया। इसके बाद अब जब 5 वीं बोर्ड का रिजल्ट सामने आया तो करीब 7 गांवों के सैकड़ों बच्चों को एक साथ फेल कर दिया। जबकि इसमें छात्र-छात्राओं की कोई गलती नहीं थी। इस विषय के अलावा बच्चे अंग्रेजी, गणित व पर्यावरण में पास हुए हैं।
पालकों की शिकायत पर मिला पुनः परीक्षा होने का आश्वासन-
बच्चों के परीक्षा परिणाम सामने आने के बाद जब पालकों ने डीपीसी प्रलय उपाध्याय को शिकायत दर्ज कराई तो उन्होंने कहा कि बच्चों की पुनः परीक्षा होगी। गलती उस समय सामने आते ही कई परीक्षा केंद्रों में सुधरवाई गई थी। लेकिन अड़मालिया का यह परीक्षा केंद्र छूट गया था। यहां की शिकायत देरी से मिली थी। तब तक पेपर हो गया था।
अभिभावकों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी-
बच्चों के अभिभावकों का कहना है गलती समूची शिक्षा विभाग की है। बच्चें दोबारा परीक्षा नहीं देंगे। शिक्षा विभाग सभी बच्चों को पास करें। यदि उचित समाधान नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। अभिभावकों ने कलेक्टर से भी अनुरोध किया है कि वे शिक्षा विभाग की इस गलती का खामियाजा बच्चों को ना भुगतने दें। कलेक्टर ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। शिक्षा विभाग की इस लापरवाही से अभिभावकों में आक्रोश है।
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बच्चों के पालकों का दर्द-
‘बच्चों के साथ और उनकी मानसिक स्थिति के साथ खिलवाड़ हुआ है। शिक्षा विभाग की गलतियों की सजा बच्चों को नहीं मिलनी चाहिए। बच्चों को हम फिर से परीक्षा नहीं दिलवाएंगे। शिक्षा विभाग गलत पूछे गए प्रश्नों के बोनस अंक बच्चों को दे।- दिनेश गरासिया, अभिभावक
‘सारे बच्चों का दिमाग हिंदी में कमजोर था। कितनी अजीब बात है गलत पेपर शिक्षा विभाग ने दिया और सजा मासूम बच्चो को मिल रही है। गलती हुई है तो सुधार भी हो सकता है। सारे बच्चों को उचित अंक देकर पास किया जाए।- नरेंद्र सिंह, अभिभावक
‘हम कुछ भी गलत काम करने की नही बोल रहे हैं। शिक्षा विभाग हमेशा बच्चों के हित में निर्णय लेता आया है, फिर बच्चों के साथ इतना बड़ा धोखा क्यूं। हमें बस न्याय चाहिए, बच्चे फिर से परीक्षा नहीं देंगे।- विनोद पाटीदार, अभिभावक
‘सारे परीक्षा केंद्रों पर सुधार करवा लिया गया तो फिर अडमालिया हाई सेकेंडरी स्कूल पर क्यूं नहीं सुधार किया गया। एक गलती ने बच्चों की खुशियों को आंसुओ में बदल दिया। हमें न्याय चाहिए। गलत प्रश्नों के बोनस अंक दिए जाए। पवन प्रजापति, अभिभावक
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