बडवानी। यदि आप अकादमिक क्षेत्र में या फिर लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के माध्यम से उच्चतम सफलताएं प्राप्त करना चाहते हैं, तो इसमें विषय-वस्तु को आत्मसात करने के साथ ही शुद्ध और संुदर लेखन शैली की भी भूमिका होती है। आप हिन्दी, अंग्रेजी या जिस भी भाषा के माध्यम से परीक्षा दे रहे हैं, उस भाषा पर आपका बहुत अच्छा अधिकार होना चाहिए। हेंडराइटिंग भी सुंदर या कम से कम पठनीय तो होना ही चाहिए। लेखन शैली प्रभावी और प्रवाहमयी होना जरूरी है।
ये बातें शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित मार्गदर्षन गतिविधि में कॅरियर काउंसलर डॉ. मधुसूदन चौबे ने विद्यार्थियों से कहीं। इन बातों का रखें ध्यान डॉ. चौबे ने बताया कि भाषा पर पकड़ बनाने और लेखन शैली को प्रभावी बनाने के लिए प्रेमचंद जी जैसे उत्कृष्ट साहित्यकारों की रचनाओं का निरंतर अध्ययन करें। प्रतिदिन लिखने का अभ्यास करें। हिन्दी से हिन्दी, हिन्दी से अंग्रेजी, अंग्रेजी से हिन्दी और अंग्रेजी से अंग्रेजी शब्दों के कोष रखें तथा उनका नियमित उपयोग करें। अपने द्वारा लिखी गई सामग्री का भाषा के जानकार व्यक्तियों से परीक्षण करवायें और उनके द्वारा दिये गये सुझावों का गंभीरता से पालन करें। लिखते समय गहरी स्याही वाली बाल पेन का उपयोग करें। नोटबुक या परीक्षा की उत्तरपुस्तिका में दोनों तरफ हाशिया छोड़ें। अवतरण बनाकर लिखें। महत्वपूर्ण तथ्यों, दिनांकों, उद्धरणों आदि को रेखांकित करें। आवष्यकतानुसार नक्षे, ग्राफ, डायग्राम, फ्लोचार्ट बनायें। समय प्रबंधन करें ताकि सभी प्रश्नों के उत्तर समान ढंग से लिख सकें।
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वॉइस ऑफ़ एमपी की मुहीम- बेज़ुबान पक्षियों के लिए दान करें सकोरे या फिर अपने मकान की छत पर रखे सकोरे, भीषण गर्मी में सुने इनकी फ़रियाद।