चित्तौड़गढ़। संत रमताराम जी, अन्तर्राष्ट्रीय संत दिग्विजय राम जी व सन्तों के सानिध्य में बाली (इन्डोनेशिया) सत्संग व आध्यात्मिक यात्रा भारत से 12 जून से रवाना होकर, बाली भगवत स्मरण के साथ 125 रामस्नेही भक्तों ने रात्रि विश्राम होटल रामायणा में करते हुए सुबह-सुबह जिधर नजरें घुमावों उधर प्रकृति प्रदत, मन मोहक हरियाली के साथ ही देवी-देवताओं की अलौकिक मुर्तियां नजर आती है। यानि बाली की धरती पर, कण कण में प्रभु विराजमान है। ऐसे विहंगम दृश्य के साथ ही सन्त दिग्विजय राम जी के श्री मुख से प्रवचनों और संत रमता राम जी के सानिध्य में भगवत स्मरण का आध्यात्मिक प्रोग्राम हुआ। संत ने कहा कि मन की हलचलों व अन्तर्द्वन्द के साथ पुरे जीवन की नैया उस प्रभु की कृपा से राम नाम के सुमिरन से, भवसागर पार हो जाती है।
इंडोनेशिया मुस्लिम बाहुल्य देश होते हुवे भी यहाँ पर बाली सनातन धर्म व हिंदुत्व दर्शन का एक सनातन सभ्यता का अनुकरणीय उदाहरण है। जहाँ सड़को पर राम जी, हनुमान जी, गणेश जी, शिव जी, मीरा जी की बड़ी बड़ी प्रतीमाए बनी हुवी है, व घर घर में मंदिर हैं। इसके अतिरिक्त भी अमूमन आपस में संबोधन में ओम् शांति, ओम् नम: शिवाए ओम् स्वस्ति अस्तु, शब्दों का प्रयोग किया जाता हैं।
यहाँ पर, उलु बाटू मंदिर, तीर्थ गंगा, मनमोहक वाटर फाल समुंद्र किनारे के दृश्य अपने आप में एक स्वर्ग, सौंदर्य एवं प्रकृति के समागम की अनुभूति कराता है।
सभी भक्त जनों द्वारा बाली में पूर्ण हिंदू संस्कृति सभ्यता को देखने के लिए और इनका धर्म के प्रति ध्दृढ़ निष्ठा देखने को बनता हैं।