नीमच। भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान को अपनी सेहत का भी ध्यान रखने की फुर्सत नहीं मिलती हैं। खाना खाने के समय से लगाकर रात को सोने का समय भी निश्चित नहीं रहता है। जिसके कारण व्यक्ति कई प्रकार की बीमारियों से जकड जाता है। फिर वर्तमान समय की चिकित्सा पद्धति से बीमार व्यक्ति को त्वरित लाभ तो मिल जाता हैं लेकिन शरीर में दवाइयों के कई साइड इफ़ेक्ट भी सामने आते हैं। उदाहरण के तौर पर किसी कमरे में अगर आग लग जाए और हम सारे खिड़की दरवाजे बंद कर दे यहाँ तक की सीमेंट से बिलकुल पेक कर दे तो हमें बाहर किसी प्रकार का धुंआ या लपटे नहीं दिखाई देगी लेकिन हम जान रहे हैं की अंदर कमरे में सबकुछ जलकर ख़ाक हो रहा हैं। ऐसा ही वर्तमान चिकित्सा पद्धति के कारण हमारे साथ हो रहा हैं।
प्राचीन काल से भारत में भिन्न-भिन्न प्रकार के चिकित्सा पद्धतियों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें एक रेकी चिकित्सा है। इस पद्धति का वर्णन अथर्ववेद में है। इस चिकित्सा पद्धति में सूर्य को ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत माना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो यह ऊर्जा हमेशा हमारे साथ रहती है। जब व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो यह ऊर्जा उसके साथ विलुप्त हो जाती है। इस ऊर्जा को अदृश्य ऊर्जा भी कहा जाता है, जो हमारे साथ अदृश्य रूप में व्याप्त रहती हैं। जबकि जापानी भाषा में इसे की कहा जाता है। इस चिकित्सा पद्धति का सबसे बड़ा यह फायदा है कि यह बीमारियों को जड़ से खत्म कर देती है। जबकि अन्य पद्धतियों में रोग को दबाया जाता है।
नीमच शहर के प्रसिद्द हड्डीरोग विशेषज्ञ डॉ यशवंत पाटीदार की धर्मपत्नी नेहा पाटीदार रेकी चिकित्सा की पढाई जामनगर (गुजरात) से लेवल 1, 2, 3 जिसे आचार्य पद कहा जाता है से की हैं ,वहीं लेवल 4, 5, 6 जिसे प्राचार्य का पद कहा जाता हैं कि पढाई ऑनलाइन सामगांव महाराष्ट्र से की हैं। नेहा पाटीदार के गुरु गजानंद सावकार हैं। वॉइस ऑफ़ एमपी से चर्चा के दौरान नेहा पाटीदार ने रेकी चिकित्सा के बारे में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने बताया कि अभी इस पद्धति से ऑनलाइन प्रातः 07 बजे से उपचार किया जाता हैं। साथ ही घर पर भी कोई बीमार व्यक्ति आता हैं तो इस पद्धति से उसका इलाज किया जाता हैं। प्रतिदिन शाम 07 से 7.45 बजे तक तीन चरणों में ओपन प्लेटफॉर्म पर इसके बारे में बताया जाता है।
नेहा पाटीदार ने बताया कि इस पद्धति में किसी भी प्रकार से कोई दवाई नहीं दी जाती हैं। यह पूरी तरह से एक नेचुरल थेरेपी हैं। जिसके तहत ब्रह्माण्ड में फैली उर्जाओं को एकत्रित कर मरीज का इलाज किया जाता हैं। जो मरीज अच्छा रिसीवर होता हैं वो उतना जल्द स्वस्थ होता हैं। योग और मेडिटेशन करने वाला अच्छा रिसीवर होता हैं। यह उपचार साइलेंट होता हैं लेकिन परमानेंट होता हैं।