नीमच। थैलेसीमिया, सिकल सेल, हीमोफीलिया एवं अन्य हीमोग्लोबिनोपैथी से पीड़ित मरीजों को बेहतर उपचार एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में नीमच से उठी आवाज अब प्रदेश स्तर तक पहुंची है। भोपाल में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की अध्यक्षता में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में थैलेसीमिया मरीजों से जुड़े विभिन्न मुद्दों और उनके समाधान पर चर्चा हुई।
बैठक में थैलेसीमिया वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष एवं थैलेसीमिया जन जागरण समिति के प्रदेश संरक्षक सत्येंद्र सिंह राठौड़ ने प्रदेशभर के मरीजों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बीमारी की रोकथाम के लिए युवाओं की निःशुल्क स्क्रीनिंग, विवाह पूर्व थैलेसीमिया जांच को प्रोत्साहित करने तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की मांग रखी।
एनएटी टेस्टेड एवं सुरक्षित रक्त की मांग-
राठौड़ ने नियमित रक्त चढ़ाने पर निर्भर थैलेसीमिया मरीजों के लिए एनएटी टेस्टेड, सुरक्षित एवं फिल्टर किए हुए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों की देखभाल को भी सरकारी स्वास्थ्य नीति में शामिल करने तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पोस्ट-केयर सहायता उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।
बैठक में बताया गया कि नीमच की संस्था अब तक 20 से अधिक बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने में सहयोग कर चुकी है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिलों के हीमेटोलॉजिस्ट विशेषज्ञों को एक नेटवर्क से जोड़कर टेली-कंसल्टेशन सुविधा शुरू करने की मांग भी रखी गई।
बैठक में थैलेसीमिया इंडिया के अध्यक्ष दीपक चौपड़ा, सचिव शोभा तुली, स्टेट नोडल ऑफिसर एवं डिप्टी डायरेक्टर एनएचएम रूबी खान सहित संबंधित विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे। स्वास्थ्य मंत्री ने प्रस्तुत सुझावों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
सुरक्षित रक्त, समय पर जांच, रोकथाम, विशेषज्ञ परामर्श और ट्रांसप्लांट के बाद देखभालकृइन पांच प्रमुख क्षेत्रों में प्रभावी पहल होने से प्रदेशभर के थैलेसीमिया एवं अन्य संबंधित रक्त विकारों से पीड़ित मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।