मंदसौर। भारी बारिश के बाद शिवना नदी का जलस्तर बढ़ने से पशुपतिनाथ मंदिर के समीप छोटी पुलिया पर बड़ी मात्रा में जलकुंभी जमा हो गई थी। गुरुवार को नदी का जलस्तर कम होने के बाद नगर पालिका की टीम जलकुंभी हटाने पहुंची। इसी दौरान विधायक विपिन जैन भी मौके पर पहुंचे और जलकुंभी को नदी से पूरी तरह बाहर निकालने के निर्देश दिए।
नदी में वापस जलकुंभी डालने से रोका-
विधायक ने नगर पालिका कर्मचारियों को जलकुंभी नदी के दूसरे हिस्से में डालने से रोकते हुए कहा कि इसे पूरी तरह नदी से बाहर निकालकर अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाए, ताकि यह दोबारा नदी के प्रवाह में पहुंचकर अवरोध उत्पन्न न करे।
विधायक खुद नदी में उतरे-
निर्देश के बाद विधायक विपिन जैन स्वयं नदी में उतरे और श्रमदानियों के साथ जलकुंभी हटाने का काम शुरू किया। नदी से निकाली गई जलकुंभी को पुलिया के पास एकत्रित कर ट्रॉलियों के माध्यम से अन्य स्थान पर पहुंचाया गया।
दो घंटे में 16 से 20 ट्रॉली जलकुंभी निकाली-
विधायक विपिन जैन और ‘शिवना योद्धाओं’ ने करीब दो घंटे तक श्रमदान किया। इस दौरान करीब 16 से 20 ट्रॉली जलकुंभी नदी से बाहर निकाली गई। जलकुंभी हटने से नदी के प्रवाह क्षेत्र की सफाई हुई। अभियान के तहत सफाई कार्य जारी है।
सावन में सफाई का विशेष महत्व-
सावन माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और नदी में स्नान भी करते हैं। ऐसे में मंदिर के समीप जमा जलकुंभी को हटाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधायक विपिन जैन ने बताया कि पिछले करीब 15 माह से शिवना नदी में नियमित श्रमदान किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पूर्व में नदी के आसपास के क्षेत्र को जलकुंभी मुक्त किया गया था, लेकिन बारिश के दौरान ऊपरी क्षेत्रों से बहकर बड़ी मात्रा में जलकुंभी दोबारा यहां पहुंच गई। उन्होंने कहा कि नदी में जलकुंभी वापस डालने के बजाय उसे बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाना जरूरी है।
हर रविवार चलाते हैं शिवना शुद्धिकरण अभियान-
विधायक विपिन जैन द्वारा प्रत्येक रविवार शिवना शुद्धिकरण अभियान के तहत श्रमदान किया जाता है। इस दौरान नदी से कचरा, गंदगी एवं अन्य अपशिष्ट बाहर निकालकर ट्रॉलियों के माध्यम से नदी से दूर ले जाया जाता है।
विधायक ने कहा कि शिवना नदी की स्वच्छता किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे शहर की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी भावना के साथ श्रमदानियों के सहयोग से नदी की सफाई का अभियान लगातार जारी रहेगा।