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October 24, 2023, 2:44 pm
NEWS : दशहरे का आध्यात्मिक रहस्य बताया आशा दीदी ने, ब्रह्मा कुमारीज सेवा केंद्र पर हुआ धर्म सभा का आयोजन, पढ़े रेखा खाबिया की खबर   

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चित्तौड़गढ़। ब्रह्मा कुमारीज प्रताप नगर सेवा केंद्र पर राजयोगिनी आशा दीदी ने बताया कि पूरे भारतवर्ष में दशहरा पर्व मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रावण हमारे अंदर बैठा है रावण के 10 शीश जो की बुराई का प्रतीक है काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, इर्षा, द्वेष, आलस, छल, भय यह 10 विकार हमारे 10 सर है इसे हमें खत्म करना है। 
उन्होंने बताया कि जब हम अपनी दिव्यता को शक्ति को अपने अंदर भरेंगे तो यह 10 कर खत्म हो जाएंगे इसलिए कभी यह नहीं कहते हैं कि रावण की हत्या करनी है रावण का वध करना है कहते हैं। दशहरा हमें इन 10 बुराइयों को हराकर जीत प्राप्त करने जब दिखाते हैं की श्री राम रावण का एक शीश काटते थे तो दूसरा शिष्य आ जाता था दूसरा काटते थे तो तीसरा आ जाता था फिर जब श्री राम जी ने नाभि पर तीर मारा जो बॉडी कॉन्शसनेस का प्रतीक है और रावण मारा गया। 
उन्होंने बताया कि हमें भी अपनी वीकनेस को अपनी बुराइयों को एक-एक करके खत्म करने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि हमें सौल कॉन्शियस में पवित्र आत्मा हूं मैं परमात्मा की संतान हूं इसी प्रकार जब हम मेडिटेशन करते हैं तो हमारी शक्तियां जागृत होती है और इन विकारों पर जीत प्राप्त करना हमारे लिए बहुत इजी हो जाता है। जब हम रावण पर जीत प्राप्त कर लेते हैं। उन्होंने बताया कि जब तक सीता जी मर्यादा की लकीर के अंदर थी तब तक रावण उन्हें उठा नहीं सका रावण कितने भी देर बाहर खड़ा रहे सीता जी को उठा नहीं सकता था। जब हम अपने जीवन की मर्यादा समाज की मर्यादा परिवार की मर्यादा क्रॉस करते हैं तो कहीं ना कहीं हमारे भीतर यह विकार प्रवेश करते हैं और हम दुखी हो जाते हैं। इसलिए आज इस दशहरा पर सभी संकल्प ले कि अपने भीतर छुपे रावण को भस्म करें और सही अर्थों में विजयदशमी मनाई।

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