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November 5, 2023, 10:53 am
KHABAR : मन के भाव शुद्ध हो तो अनपढ़ का भी आत्म कल्याण हो सकता है, चातुर्मास धर्मसभा में प्रवर्तकश्री विजयमुनिजी मसा ने कहा, पढ़े खबर 

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नीमच। संसार में अनेक बार विद्वान ज्ञानी व्यक्ति भी आत्म कल्याण नहीं कर पाते हैं उनके आत्म कल्याण में ज्ञाना वर्णि कर्म का उदय हो जाता है और ज्ञाना वर्णि कर्म को तोड़े बिना आत्म कल्याण नहीं होता है लेकिन यदि मन के भाव शुद्ध है तो अनपढ़ व्यक्ति का भी आत्म कल्याण हो जाता है। जैन समाज में अनेक साध्वी महा सतियाजी भी अनपढ़ थी लेकिन उन्होंने धर्म आगम को श्रवण कर याद किया और अपने आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया जो आज भी आदर्श प्रेरणादाई प्रसंग है।यह बात जैन दिवाकरीय श्रमण संघीय, पूज्य प्रवर्तक, कविरत्न श्री विजयमुनिजी म. सा. ने कही। वे श्री वर्धमान जैन स्थानकवासी श्रावक संघ के तत्वावधान में गांधी वाटिका के सामने जैन दिवाकर भवन में आयोजित चातुर्मास  धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन में प्रतिदिन धर्म का स्वाध्याय कर सम्यक ज्ञान को ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए। धर्म ग्रंथो का स्वाध्याय निरंतर कर उसके भावार्थ को जीवन में आत्मसात कर ज्ञान के आवरण को तोडेंगे तभी आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। बच्चा बचपन से लेकर महाविद्यालय तक एकाग्रतापूर्वक अध्ययन करता है और निरंतर अपनी स्मरण शक्ति से ज्ञान को स्मरण में करता है तभी वह विद्वान बनता है।
साध्वी डॉक्टर विजया सुमन श्री जी महाराज साहब ने कहा कि साधु संतों को पवित्र भाव से आहार दान करने से पाप कर्मों की निर्जरा होती है। धार्मिक ग्रंथो का स्वाध्याय करने से पुन्यार्जन बढ़ता है। बहुत से लोगों को प्राकृत भाषा समझ नहीं आती है। उदाहरण जैसे सर्प बिच्छू का जहर  मंत्र से उतरता है हम वह मंत्र के शब्द नहीं समझते हैं।निरंतर अभ्यास करने से मंत्र और ज्ञान  को सीखा जा सकता है और संसार में भलाई के कार्य किया जा सकते हैं। 
धर्म सभा में महेंद्र जैन जावरा, सुभाष तातेड़ सिकंदराबाद, अतिथि के रूप में उपस्थित थे ।जिनका श्री संघ पदाधिकारीयों द्वारा सम्मान किया गया।
तपस्या उपवास के साथ नवकार महामंत्र भक्तामर पाठ वाचन ,शांति जाप  एवं तप की आराधना भी हुई। इस अवसर पर  विभिन्न धार्मिक तपस्या पूर्ण होने पर सभी ने सामूहिक अनुमोदना की।
धर्म सभा में उपप्रवर्तक श्री चन्द्रेशमुनिजी म. सा, अभिजीतमुनिजी म. सा.,  अरिहंतमुनिजी म. सा., ठाणा 4 व अरिहंत आराधिका तपस्विनी श्री विजया श्रीजी म. सा. आदि ठाणा का सानिध्य मिला।  धर्मसभा  में  संत दर्शन कर आशीर्वाद ग्रहण किया। धर्म सभा का संचालन भंवरलाल देशलहरा ने किया।

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