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November 24, 2023, 10:44 am
KHABAR : प्रवर्तकश्री विजयमुनिजी मसा ने कहा- जैन दिवाकर जयंती उत्सव, जैन दिवाकर शांति पाठ आज, दुख से प्रेम करेंगे तो वह कट जाएगा लेकिन राग द्वेष से किया तो वह बढ़ता ही जाएगा, पढ़े खबर  

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नीमच। संसार में जिससे प्रेम करो वह अपना बन जाता है और जिस राग द्वेष रखते हैं वह पराया हो जाता है दुख से भी प्रेम करो उसे भी अपना बनाना चाहिए दुख के प्रति सदैव सजग रहो यदि दुख से प्रेम करेंगे तो वह कट जाएगा लेकिन द्वेष किया तो वह बढ़ता ही जाएगा वर्तमान में लोग दुख को पालते हैं। पोसते हैं और बड़ा करते हैं इसलिए वह खत्म नहीं होता। दुख से मुक्त होने का एकमात्र मार्ग ज्ञान है जिसे भी होता है वह दुख को अनासक्त हो होकर भोंगते हुए आत्म कल्याण कर लेता है।
यह बात जैन दिवाकरीय श्रमण संघीय, पूज्य प्रवर्तक, कविरत्न श्री विजयमुनिजी म. सा. ने कही। वे श्री वर्धमान जैन स्थानकवासी श्रावक संघ के तत्वावधान में गांधी वाटिका के सामने जैन दिवाकर भवन पर दिवाकर जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित  धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जिसकी आत्मा जागृत होती है वह सुख में भटकती नहीं है। और दुख में अटकती नहीं है वर्तमान में लोग सुख में अटकेते हैं और दुख में भटकते हैं जबकि दोनों स्थितियों में केवल सजग रहना चाहिए। कोई भी व्यक्ति किसी साधु या निराश्रित व्यक्ति  को  आहार दान करें तो उसे रोकना नहीं चाहिए। पाप कर्म बढता है। यदि किसी रोगी को कोई आहार ग्रहण करने से रोग बढ़ता है तो उस आहार को रोकना पुण्य कर्म होता है। प्राचीन काल में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से अनेक रोग ठीक हो जाते थे।  कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का तपस्या करें तो उसकी अनुमोदना करनी चाहिए तो पुण्य बढ़ता है।संसार में सुख चाहिए तो जीव दया का पालन करना चाहिए।सभी ऐसी प्रेरणा ले कि लोगों के कष्ट  मिट जाय। हमारी वजह से किसी को कष्ट नहीं हो इस बात का सदैव ध्यान रखना चाहिए तो हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है। संयम चरित्र को जीवन में आत्मसात कर नियम संयम का पालन करना चाहिए तो आत्मा का कल्याण हो सकता है।साध्वी डॉक्टर विजय सुमन श्री जी महाराज साहब ने कहा कि चौथमल जी महाराज साहब ने हजारों निर्धन असहाय दीन दुखियों की सेवा का पुण्य कर्म प्रारंभ किया था जो आज भी निरंतर जारी है। जीवन में छोटे-छोटे नियम लेने से भी पुण्य कर्म बढ़ता है। चौथमल जी महाराज साहब जैसे महान व्यक्ति का जीवन चरित्र आज भी आदर्श प्रेरणादाई प्रसंग है।तपस्या उपवास के साथ नवकार महामंत्र भक्तामर पाठ वाचन ,शांति जाप  एवं तप की आराधना भी हुई। इस अवसर पर गुरुवार सुबह 11 बजे चौन दिवाकर धार्मिक प्रश्न मंच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया इसमें सभी समाज जनों ने उत्साह के साथ भाग लिया। विजेताओं को  सम्मानित किया गया।
जैन दिवाकर शांति पाठ आज,......
जैन दिवाकर महिला मंडल नीमच छावनी की अध्यक्ष श्रीमती रानी राणा,सचिव सीमा चोपड़ा, कोषाध्यक्ष  सुरेखा चंडालिया ने बताया कि गुरु चौथमल जी महाराज साहब जैन दिवाकर के 146 वें जयंती महोत्सव के  पावन उपलक्ष्य एवं कार्यक्रम की श्रृंखला में  गुरुवार 23 नवंबर को दोपहर 1 बजे  जैन दिवाकर प्रश्न मंच एवं धार्मिक प्रतियोगिताएं आयोजित की गई।आज 24 नवंबरशुक्रवार को दोपहर 1 बजे शांति पाठ का जाप, धर्म प्रभावना दिवाकर महिला मंडल की ओर से रहेगी।
शनिवार 25 नवंबर को शासकीय अस्पताल में प्रातः 9ः बजे फल फ्रूट बिस्किट एवं गायों का हरा चारा वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। रविवार 26  नवंबर को सुबह 9 बजे जैन दिवाकर  का चालीसा पाठ आयोजित किया जाएगा। दो भाग्यशाली विजेताओं के ड्रॉ खोलकर सम्मानित किया जाएगा। ड्रॉ के धर्म लाभार्थी श्रीमती संगीता राजेंद्र जारोली तथा मंजू सावर लाल कांठेड़ परिवार होंगे। दोपहर 1 बजे बच्चों की धार्मिक फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता  11 वर्ष से ऊपर वर्ग की आयोजित की जाएगी। दोपहर 2 बजे हॉस्पिटल में फल वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
27 नवंबर को सुबह 9 बजे लोका शाह जयंती एवं विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा।
इस अवसर पर  विभिन्न धार्मिक तपस्या पूर्ण होने पर सभी ने सामूहिक अनुमोदना की।
धर्म सभा में उपप्रवर्तक श्री चन्द्रेशमुनिजी म. सा, अभिजीतमुनिजी म. सा.,  अरिहंतमुनिजी म. सा., ठाणा 4 व अरिहंत आराधिका तपस्विनी श्री विजया श्रीजी म. सा. आदि ठाणा का सानिध्य मिला। चातुर्मासिक मंगल धर्मसभा में सैकड़ों समाज जनों ने बड़ी संख्या में उत्साह के साथ भाग लिया और संत दर्शन कर आशीर्वाद ग्रहण किया। धर्म सभा का संचालन भंवरलाल देशलहरा ने किया।

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