BREAKING NEWS
KHABAR : नयागांव में हर्षाेल्लास से मनाया.. <<     VIDEO NEWS: तिरंगे की शान, जवानों का शौर्य और बच्चों.. <<     VIDEO NEWS: तिरंगे से सजे वाहन, युवाओं का जोश और भारत.. <<     BIG REPORT : हाथों में तिरंगा, दिलों में देशभक्ति..,.. <<     कालापीपल के भैसागढ़ा में धूमधाम से मना 80वां.. <<     KHABAR : स्वतंत्रता दिवस पर नीमच विधायक दिलीप.. <<     NEWS : आजादी के पर्व पर हरियाली का संकल्प,.. <<     NEWS : चित्तौड़गढ़ जिला कांग्रेस कार्यालय में.. <<     NEWS : नगरीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के.. <<     KHABAR : तिरंगे संग निकले नन्हे देशभक्त, भाटखेड़ी.. <<     NEWS : वंडर सीमेंट लि. के पाटनी पब्लिक स्कूल में.. <<     KHABAR : समाजसेवी अंबालाल पाटीदार ने स्कूल में.. <<     KHABAR : भारत माता के जयघोष से गूंजा शहर, नीमच में.. <<     कसरावद में हर्षोल्लास से मना 80वां स्वतंत्रता.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
November 26, 2023, 12:26 pm
KHABAR : चातुर्मास धर्मसभा में उमड़ रही समाजजनों की भीड़, आचार्य प्रसन्नचंद्र सागरजी महाराज ने कहा- नालंदा विश्वविद्यालय ने पूरे विश्व ज्ञान के संस्कार का मार्गदर्शन प्रदान किया था, पढ़े खबर  

Share On:-

नीमच। नालंदा विश्वविद्यालय के अनुभवी गुरुजनों द्वारा पूरे विश्व के विद्यार्थियों को संस्कार युक्त ज्ञान प्रदान किया गया था जो आज भी आदर्श प्रेरणादाई प्रसंग है।नालंदा के तत्कालीन राजा द्वारा जैन समाज के साधु-संतों श्रावक श्राविकाओं का राजा के दरबार में सीधे प्रवेश का सम्मान मिलता था।यह यह सम्मान पुण्य कर्मों के कारण मिलता था। उस समय भी जैन समाज जीव दया अहिंसा जीओ और जीने दो के मार्ग पर चलता था इसीलिए पूरे विश्व में इनको सम्मान मिलता था।

यह बात श्री जैन श्वेतांबर भीड़भंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट श्री संघ नीमच के तत्वावधान में बंधू बेलडी पूज्य आचार्य श्री जिनचंद्र सागरजी मसा के शिष्य रत्न नूतन आचार्य श्री प्रसन्नचंद्र सागरजी मसा ने कही। वे चातुर्मास  के उपलक्ष्य में जाजू बिलिं्डग के समीप पुस्तक बाजार स्थित नुतन जैनआराधना भवनघ्  में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन में जीव दया का संकल्प लेना चाहिए ।यदि भूल वस किसी जीव की हत्या हो जाए तो क्षमा मांग कर प्रायश्चित करना चाहिए। कभी किसी से पाप कर्म काम हो जाता है।प्राचीन काल में राजा महाराजा के युग में पोषध व्रत करने के लिए अलग से कक्ष स्थापित होते थे।दीक्षा संयम जीवन बिना आत्म कल्याण नहीं होता है।व्यक्ति यदि दीक्षा नहीं ग्रहण कर सके तो कोई बात नहीं ,12 व्रत व पौषध वृत धारी बनकर संयम जीवन का पालन कर सकते हैं।

श्री संघ अध्यक्ष अनिल नागौरी  ने बताया कि धर्मसभा में तपस्वी मुनिराज श्री पावनचंद्र सागरजी मसा एवं पूज्य साध्वीजी श्री चंद्रकला श्रीजी मसा की शिष्या श्री भद्रपूर्णा श्रीजी मसा आदि ठाणा 4 का भी  चातुर्मासिक सानिध्य मिला। समाज जनों ने उत्साह के साथ भाग लिया। उपवास, एकासना, बियासना, आयम्बिल, तेला, आदि तपस्या के ठाठ लग रहे है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE