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December 12, 2023, 10:51 am
KHABAR : आचरण में सरलता बिना धर्म की प्राप्ति नहीं होती है- प्रवर्तक श्री विजयमुनिजी म सा, जमुनिया कला के महावीर भवन में आयोजित हुई धर्मसभा, पढ़े खबर  

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नीमच। जीवन के आचरण में सरलता बिना धर्म की प्राप्ति नहीं होती है। महापुरुषों के सानिध्य में अनेक पाप कर्म करने वाले व्यक्ति भी पाप कर्म का त्याग कर धर्म के सरल मार्ग की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हुए हैं। पूरे देश में जैन संतों की प्रेरणा से कई जेनेत्तर समाज के लोगों ने भी जैन उपदेशों को जीवन में आत्मसात कर अपनी आत्मा के कल्याण का मार्ग स्वीकार कर लिया है। इससे जीव दया बढ़ी है और पाप कर्म कम हुआ है। यह बात जैन दिवाकरीय श्रमण संघीय, पूज्य प्रवर्तक, कविरत्न श्री विजयमुनिजी म सा ने कही। वे श्री वर्धमान जैन स्थानकवासी श्रावक संघ जमुनिया कलां के तत्वावधान में गणेश मंदिर के समीप महावीर भवन में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे।उन्होंने कहा कि सम्यक दर्शन को प्राप्त किए बिना आत्मा का कल्याण नहीं हो सकता है। राग द्वेष को जीतने वाले को इंद्र देवता भी नमन करते हैं। इसलिए राग द्वेष को जीतकर शांति के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए तभी आत्मा का कल्याण हो सकता है। जीवन में आत्मा का कल्याण करना है तो सत्य अहिंसा दया अपरिग्रह के सिद्धांतों को समझना होगा, संसार छोड़ने योग्य है। संयम जीवन ग्रहण करने योग्य है इससे हमें समझना होगा। 9 धर्म तत्वों को समझे बिना मोक्ष मार्ग नहीं मिलता है। हम जितने सरल होंगे तभी हमारा कल्याण होगा। जिस प्रकार लकड़ी का स्वभाव हल्का होता है वह पानी पर तैरती है। पत्थर का स्वभाव भारी होता है, वह डूबता है। पुण्य और अच्छे विचार रखेंगे तो ऊपर उठेंगे। पाप कर्म वाले विचार रखेंगे तो हम नीचे की ओर जा सकते हैं।
चंद्रेश मुनि जी महाराज साहब ने कहा कि जिस प्रकार पत्थर पर फसल ओर बीजों की खेती नहीं हो सकती है इसी प्रकार जीवन में यदि पाप के मार्ग पर चले और कठोरता के साथ रहे तो विनम्रता ओर सरलता नहीं आ सकती है और सम्यक दर्शन भी प्राप्त नहीं होता है। जिस प्रकार नरम मिट्टी पर बीजा रोपण करें तो फसल उगाई जा सकती है ठीक उसी प्रकार जीवन में सरलता को आत्मसात करें तो धर्म को प्राप्त कर सकते हैं और आत्म कल्याण का मार्ग प्राप्त कर सकते हैं। 
अरिहंत आराधक तपस्वी साध्वी डॉक्टर विजया सुमन श्री जी महाराज साहब ने कहा कि आत्मा का स्वभाव ऊपर उठने का होता है परंतु पाप कर्मों के कारण आत्मा चारों गति में परिभ्रमण कर भटकती रहती है। आत्मा परमात्मा को ढूंढने के लिए प्रयत्न करती रहती है। परमात्मा को खोजना नहीं खो जाना है तभी हमारी आत्मा का कल्याण हो सकता है।
इस अवसर पर माणक चंद बाबूलाल खिंदावत, विमल नागोरी सहित सभी समाज जनों ने उत्साह के साथ भाग लिया। धर्म प्रभावना का वितरण लोकेश खिंदावत परिवार की ओर से किया गया। धर्म सभा का संचालन बलवंत नागौरी ने किया।
इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक तपस्या पूर्ण होने पर सभी ने सामूहिक अनुमोदना की। धर्म सभा में उपप्रवर्तक श्री चन्द्रेशमुनिजी म सा, अभिजीतमुनिजी म सा,  अरिहंतमुनिजी म सा, ठाणा 4 व साध्वी डॉक्टर विजया सुमन श्री जी महाराज साहब का सानिध्य मिला। मंगल धर्मसभा में सैकड़ों समाज जनों ने बड़ी संख्या में उत्साह के साथ भाग लिया और संत दर्शन कर आशीर्वाद ग्रहण किया। प्रभावना का वितरण लोकेश खिंदावत परिवार की ओर से किया गया।

 

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