चित्तौड़गढ़। दुर्ग पर गुप्त नवरात्रि के अवसर पर दैवीय भागवत कथा महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत द्वितीय दिन दैवीय भागवत कथा महोत्सव कार्यक्रम प्रातः 7.15 बजे यज्ञ, पुजा अर्चना के साथ प्रारंभ हुआ। जिसमे यज्ञाचार्य आचार्य पंडित मुकेश कुमार शर्मा भीलवाड़ा के सानिध्य में पांच-पांच पंडित के द्वारा मांबायण अन्नपूर्णा देवी एवं कालिका माता मंदिर पर पुजा अर्चना के साथ 8.15 बजे से श्रीदुर्गा सप्तशती पाठ विधि विधान से किया।
आयोजन समिति सदस्य नरेंद्र सिंह नाहरगढ़ ने बताया कि दुर्ग दोपहर 1 बजे से दैवीय भागवत कथा महोत्सव गौ प्रेमानंद श्रीलालचरण महाराज के मुखारविंद से शक्ति, भक्ति, त्याग, बलिदान की धरती पर हुए जौहर व साके में बलिदानी आत्माओं को स्मरण करते हुए बताया कि वीरता में जब सतीतव चढ़ता है तब मृत्यु उनके वश में हो जाती है। सतीतव जब आत्मा में सवार हो जाता है तब हंसते-हंसते मृत्यु को वरण कर लेते हैं। मन की इच्छा स्वयं के कल्याण में बहुत बड़ी बाधक है। इच्छाएं अनेक है एक के बाद एक लगी रहती है 84 लाख योनियो के पश्चात मनुष्य जीवन मिलता है। लेकिन मनुष्य धर्म विमुख होकर सिर्फ कामना की आशा में जीवन व्यतीत कर देते हैं, जबकि निष्काम भावना से परमसत्ता को प्राप्त कर सकते हैं। गुरु की महिमा अपरंपार है, भवसागर पार करने के लिए मीराबाई ने रैदास जी को अपना गुरु बनाकर भगवान कृष्ण में अंतरध्यान होते हुए संदेश दिया कि गुरु छोटा बड़ा नहीं होता है।
बावजी चतर सिंह जी की चौपाई अठी वठी कठी नी देखणो की व्याख्या करते हुए बताया की सांसारिक मोह माया लोभ अहंकार सबको छोड़कर सिर्फ परमात्मा की प्राप्ति के लिए निष्काम भाव से परम कल्याण के लिए राम नाम रटते रहे हैं बाकी सब झूठी झंझट है। मां गंगा एवं शांतनु का प्रसंग सुनते हुए राजा देवव्रत का प्रजा के प्रति समर्पण भाव का गुणगान किया शिव निरंकार है शंकर साकार है। प्रसंग सुनाते हुए जैसे जल समुद्र में अग्नि सूर्य में मिलती है इस तरह जीवात्मा को परमात्मा से मिलने के लिए सत्संग एवं देवी भागवत कथा अचूक साधन है।
कथा श्रवण करने वाले राजसमन्द जिले शैलागुडा, देवरिया, भीलवाड़ा जिले से थाणा, दौलतगढ़, देवगढ़, चित्तौड़गढ़ दुर्ग सहित मध्यप्रदेश से पधार रहे हैं। कथा महोत्सव में बख्तावर सिंह पंवार दुर्ग से रतन सिंह शान्तीलाल पालीवाल, शहीद चन्दन सिंह के अग्रज नंदसिंह, गोविंद शर्मा, गोविन्द कंवर, राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की महिला जिला अध्यक्ष सुरभि शक्तावत, सुमन कंवर राठौर, प्रीति चौहान, सत्यपाल सिंह थाणा, लालसिंह अमराणा, राजस्थानी भाषा संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष कानसिंह सुवावा, मोहब्बत सिंह थाणा, महावीर सिंह कमेरी, मनमोहनसिंह थाणा, रतनसिंह केमुनिया, शंकरसिंह कोटडी, हेमेन्द्रसिंह बोहेड़ा, श्यामसिंह चुण्डावत सेमलिया बेगूं, सत्यनारायण आश्रम ज्ञानगढ़ विधालय के श्रवण सिंह, प्रियंका कुमारी, ज्योति कुमारी, राजेंद्र सिंह नयागढ़ सहित कई गणमान्य महिला पुरुष उपस्थित थे।
कल पंडित साहब द्वारा दुर्गा सप्तशती पाठ, पुजा अर्चना राजटीला, जौहर स्थली, सुरजपोल दरवाजा पर स्थित सांईदास, ईश्वर दास चुण्डावत की पुजा अर्चना किया जाएगा। प्रातः 7.15 बजे से 12.00 बजे तक यज्ञ हवन होगा। कथा महोत्सव 1.15 बजे से 5 बजे तक होगी