खरगोन। सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक गणगौर पर्व का उल्लास चरम पर है। हालाकि शुक्रवार को अचानक बदले मौसम के मिजाज ने खलल डाली। कई स्थानों पर निकलने वाले चल समारोह प्रभावित हुए। शहर से लेकर गांव. कस्बो तक ईसरदासजी आयो.आयो चौतडल्या रो मास जी, जंवारा जतन कर राखज्यो जी। जैसे मारवाडी, राजस्थान और निमाडी बोली पर गणगौर गीतो पर महिलाओं ने झालरिया देकर आराधना की। जिन क्षेत्रों में चौत्र तृतीया याने गुरुवार को बाडिय़ां खुली उन बाडिय़ो के जवारो को श्रृंगारित रथो में शुकवार देरशाम घाट पर भ्रमण के लिए ले जाया गया, यहां से मन्नतधारी परिवार मान. मनुहार कर माता को अपने घर लाए। गणगौर घाट पर माताजी का विशेष पूजन.अर्चन किया गया। यहां कुछ देर रुकने के माता को पानी पिलाकर, यहां से मन्नत वाले श्रद्धालुओं द्वारा रथ बौड़ाकर माता की मनुहार कर उन्हें बेटी की तरह घर लाया गया। शनिवार से माता की विदाई याने विसर्जन का दौर शुरु होगा।