चीताखेड़ा। चीताखेड़ा अंचल में अप्रैल माह की शुरुआत में ही दिन का तापमान में गिरावट आई है और रात का भी तापमान कम डिग्री सेल्सियस रहा है। वहीं शुक्रवार को दिन भर बादलों ने आसमान में डेरा जमाए रखा। दर असल पिछले पांच दिनों से गर्मी के तेवर नरम है। दोपहर बाद आसमान में डेरा डाले बादल बरस पड़े। आरोग्य देवी महामाया आवरी माता जी मन्दिर परिसर में आयोजित मेले में रंगमंच पर बारिश के साथ मक्का के आकार के गिरे ओले के चलते शुक्रवार मेले में आई आफत।
वैसे वर्तमान में अभी ऐसा सिस्टम बना हुआ है कि बार- बार बादल छाए हुए हैं, और कभी तेज धूप तो कभी देखते ही देखते आसमान को काली घटाएं ढंक देती है। उमस भरी तेज तपन से शाम होते-होते राहत पहुंचा ही देती है। अप्रैल माह के प्रारंभ में ही एक नए पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर भारत में आने से चीता खेड़ा अंचल में फिर से बादल उमड़ घुमड़ करने लगा और बैमौसम बारिश शुरू होने लगी है, जिससे चीताखेड़ा गांव से लगा माता का खेड़ा की पावन धरा पर स्थित तीर्थ स्थल आरोग्य देवी महामाया आवरी माता जी मन्दिर परिसर में मेला समिति द्वारा आयोजित नौ दिवसीय मेले में खलल डाल दी है। जिससे तय किए गए सांस्कृतिक मंच पर कार्यक्रम बरसात के कारण स्थगित करना पड़ा । वहीं मेले में लगी दुकानों के दुकानदारों को भी बारिश से प्रभावित होना पड़ रहा है। शुक्रवार को दोपहर बाद गर्जना करते हुए आखिरकार बरस ही पड़े। बारिश के साथ मक्का के आकार के ओले गिरे जिससे मेला समिति, दुकानदारों और श्रद्धालुओं में बारिश ओर ओले गिरने से खासे प्रभावित हो रहे हैं। गुरुवार को भी आवरी माता जी मन्दिर परिसर में आयोजित रंगमंच पर स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होने वाला था परन्तु अचानक बारिश आ जाने से स्थगित करना पड़ा। और दूसरे दिन भी ऐसा ही हुआ शाम होने से पूर्व ही आफत की बारिश शुरू हो गई। मेले में आने वाले दुकानदार कुछ कमाने का सपना संजोए बैठे थे परन्तु यकायक बारिश ने कमाई तो दूर और दुकानदारों को ज्यादा नुक्सान उठाना पड़ा गया है। मेले में आए दुकानदार वहीं दूसरी ओर आरोग्य देवी महामाया आवरी माता जी के अलौकिक दरबार में असाध्य रोग से ग्रसित लकवाग्रस्त रोगियों के परिजनों को खुल्ले आसमान के नीचे सभी को भोजन बनाने में व्यवधान उत्पन्न हो गया। यह सब परेशानियों को देखते हुए मंदिर समिति ने ताबड़तोड़ व्यवस्था कर दुकानदारों एवं लकवाग्रस्त रोगियों व परिजनों के लिए गुरुवार और शुक्रवार को भी भोजन व्यवस्था कर सभी को भोजन करवाया गया। शुक्रवार शाम 7 बजे बाद भी आसमान में काली घटाएं डेरा डाले हुए थे।