जबलपुर। जाबालि ऋषि जिनके नाम पर जबलपुर बसा। उनकी प्रतिमा का नर्मदा किनारे अनावरण हुआ। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में उनके भक्त मां नर्मदा किनारे पहुंचे। जबलपुर से 30 किलोमीटर दूर लम्हेटीघाट पर जाबालि ऋषि की प्रतिमा को स्थापित किया गया। जाबालि ऋषि जी का पहला मंदिर नर्मदा किनारे बनवाया गया हैं। लम्हेटा घाट के सद्गुरु परमहंस स्वामी ने वैदिक मित्रों के उच्चारण के साथ महर्षि जाबालि और उनके भक्त काशी महाराज की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की।
सद्गुरु परमहंस स्वामी ने बताया कि नर्मदा नदी का यह किनारा जहां पर की जबलपुर को नाम देने वाले जाबालि ऋषि की प्रतिमा को स्थापित किया गया है, यह संभवत विश्व में पहला ऐसा स्थान है, जहां जाबालि ऋषि की प्रतिमा का अनावरण किया गया हैं। जैसे ही ऋषि की प्रतिमा स्थापित की गई, वैसे ही नर्मदा तट जय घोष से गूंज उठा। संतों ने महर्षि जाबालि ऋषि की जय जयकार कि, उनका गुणगान किया, इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
सद्गुरु परमहंस स्वामी ने बताया कि नर्मदा किनारे का लम्हेटीघाट स्थित परमहंस आश्रम भृगु क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध है। भृगु ऋषि व महर्षि जाबालि ऋषि ने यहां वर्षों तक तपस्या की थी। उन्होंने जाबाली ऋषि और त्रेता युग से जुड़े रामायण प्रसंग की जानकारी भी। बताया जाता है कि जब भरत जब भगवान श्री राम को वनवास छोड़ अयोध्या लौटने का आग्रह करने गए थे, तब संग में जाबालि ऋषि भी साथ में गए थे। शास्त्रों के अनुसार अयोध्या राज परिवार में जाबालि ऋषि की महत्वपूर्ण भूमिका भी थी। ऋषि ने इसी नर्मदा किनारे कई सालों तक तपस्या की थी और उनका देहवासन भी इसी नर्मदा किनारे हुआ था। यही वजह है कि नर्मदा किनारे के इस स्थान को जाबालि ऋषि का कहा जाता हैं। जाबालि ऋषि के नाम पर इस शहर का जाबालिपुरम पड़ा, जिसे कि अभी जबलपुर कहा जाता हैं। जाबालि ऋषि के भक्त काशी महाराज ने भी इसी स्थान पर सालों बिताए थे। लम्हेटीघाट पर जाबालि ऋषि और काशी महाराज की प्रतिमा स्थापित की गई हैं।
चंद्रलोक आश्रम के आलोक दास ने बताया कि जाबालि ऋषि की मूर्ति की प्रतिष्ठा विश्व में प्रथम जबलपुर के नर्मदा तट पर हुई है। चंद्रलोक आश्रम लम्हेटीघाट के काशी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर जाबालि ऋषि घाट का निर्माण किया गया। न्यू भेड़ाघाट रोड स्थित श्री परमहंस आश्रम चंद्रलोक में यह प्राण प्रतिष्ठा समारोह नर्मदा तट के संतों की मौजूदगी में संपन्न हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मौजूद रहे।
एक दिवसीय आयोजन में नर्मदा तट के संतों द्वारा आध्यात्मिक विचार विमर्श किया गया। श्री परमहंस आश्रम चन्द्रलोक के समस्त भाविक जन द्वारा इस अवसर भंडारा व प्रसाद वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जबलपुर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के हजारों धर्मालुओं उपस्थित हो कर इस देव दुर्लभ क्षणों के साक्षी बने।