देवास। नेवरी में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित आकाश दुबे वृंदावन धाम ने सती चरित्र श्रवण करते हुए कहा बिना बुलाए कहीं भी नहीं जाना चाहिए सती माता अपने पिता दक्ष प्रजापति के यहां गई और सम्मान मिला नहीं शास्त्र मत है। किसी के यहां सोना ही क्यों नहीं बरस रहा हो पर बिना बुलाए कभी नहीं जाना चाहिए बिना बुलाए जाओगे तो जीवन में कभी सम्मान नहीं मिलेगा।
दुबे ने बताया कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे है वहां आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान हो। यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों न हो।
कथा में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए समझाया कि भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। पंडित दुबे ने बताया कि भगवान कृष्ण ने नरक को धोबी घाट की तरह बनाया है। इस प्रकार जब तक कपड़े में से दाग नहीं धुल जाते, तब तक धोबी उसको घाट पर पटक-पटक कर मारता रहता है। इसी प्रकार जब तक जीव के दोष, पाप समाप्त नहीं हो जाते तब तक उसको नरक में विभिन्न प्रकार की यातनाएं दी जाती है। भगवान के द्वारा 28 प्रकार के नरक बनाए गए भागवत कथा 3 बजे से 6 बजे तक सुनाई जा रही है तब पश्चात महा आरती के बाद महाप्रसादी का वितरण किया गया महा आरती रमेश चंद्र गुप्ता परिवार के द्वारा की गई।