चीताखेड़ा। जंगल में इन दिनों जंगली कटीली झाड़ियों करमंदी पौधों पर करमंदे फलों से लदे हुए हैं। यह फल काले रंग जामुन की तरह हुबहू स्वादिष्ट खट्टे मीठे लगते हैं। जिन्हें लोग बड़े ही शौक चाव से खाते हैं। यह कटीली झाड़ियां जीरन मार्ग पर दलपतपुरा झील में स्थित रामझर महादेव मंदिर क्षेत्र में फैली हुई है। जहां रामझर महादेव के दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुजन एवं राह से गुजरने वाले हर राहगीर बड़े ही शौक से खा रहे हैं।
धर्म ग्रंथों में वर्णित हजारों वर्ष पूर्व त्रेतायुग में भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान श्री राम, शेषावतार लक्ष्मण और माता जानकी ने कंद मूल के साथ -साथ करमंदी पौधों से करमदे इन्हीं फलों को बड़े ही चाव से खाए थे। यह फल वर्ष में एक बार गर्मी के मौसम में ही आता है और इनकी खास विशेषता यह है कि गर्मी के समय बैमौसम बारिश के पानी लगने से जल्दी पक जाते हैं और बड़े ही स्वादिष्ट लगते हैं। विशेष रूप से स्पेशल शौकिन लोग गर्मी की परवाह नहीं करते हुए परिवार के साथ करमंदे खाने के लिए जंगल में जाते हैं। रामझर महादेव के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु अपने परिवार सहित रामझर महादेव मंदिर क्षेत्र में करमंदी के पौधे झाड़ियों पर करमंदे फलों से लदे हुए हैं जिनका रामझर महादेव के दर्शन करने पहुंचा एक परिवार करमंदे खाने का आंनद लेते हुए।