मनासा। इंसान मौजूदा समय में अपने परिवार और घर दुकान बनाने में इतना व्यस्त हो गया है कि उसे अपनी आत्मा की भी परवाह नही रही और नहीं परमात्मा का सुमिरन कारने का समय रहा है। लेकिन हकीकत तो यह है कि दुकान मकान और परिवार सभी यही रह जाएगा। जितनी भागदौड और चिंता इनके लिए कर रहे हो उसमें से थोडी चिंता अपनी आत्मा के लिए भी करे। मनुष्य जीवन दुर्लभ है यह अनमोल है। चातुर्मास दान शील तप का भाव जागृत करता है।
यह बात साध्वी श्री सौम्य यशाश्री म.सा. ने नगर के अनुपुरा गली स्थित जैन ष्श्वेतांबर मंदिर पर चातुर्मास के एक दिन पहले प्रवचन माला में कहीं। साध्वी श्री ने कहा कि चामुर्तास चेतना को जगाने के लिए होता है। इस दौरान व्यक्ति को दन शील तप के लिए जीवन को समर्पित करना चाहिए। सच्चाई तो यह है की जिस परिवार और दुकान घर को संभालने के लिए चिंता में रात दिन डुबे रहते हो वो एक दिन सभी यही रह जाएंगा। लेकिन परमात्मा के प्रति की गई भक्ति आपके पुरूषार्थ के काम आएंगा।
इसलिए कहा कि व्यक्ति को इन सभी के अलावा अपनी आत्मा की शांति के लिए चातुर्मास में जीवन को समर्पित करना चाहिए। साध्वी श्री म.सा. यहां पर 4 महिने तक जैन श्वेताबंर मंदिर में चातुर्मास करेगे। जैन समाज के आनंद मानावत ने बताया कि 20 जुलाई से चातुर्मास बैठेगा। मंदिर परिसर में प्रतिदिन सुबह 9.15 से 10.15 बजे तक म.सा. के प्रवचन होगे।